-राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को किया गया निस्तारित
अयोध्या। वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने मॉं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। इस मौके पर न्यायाधीश ने बताया गया कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे।
सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है।
उन्होंने आगे कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्टेªट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा।
इस अवसर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रिया सक्सेना ने बताया की धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये।
दीपक यादव, अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं प्रिया सक्सेना सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय अयोध्या ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि 21980954 रू है। जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट) निवेदिता सिंह ने 35459 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है।
रविकांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 105 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 85 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 6,51,19,807/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी। बैंक रिकवरी से संबन्धित 683 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 4,64,21,488/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है।
पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 57 मुकदमों को निस्तारित किया गया है, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 02 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833- रू सेटेलमेंट किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4510 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2086 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है। राजस्व मामलों से संबन्धित 30996 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये।
इस मौके पर अपर जिला जज/नोडल अधिकारी दीपक यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रिया सक्सेना, रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0, वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय, राहुल कात्यान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम, रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रतिभा नारायण, इन्द्रजीत सिंह, अर्चना तिवारी, प्रदीप कुमार सिंह, रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सतीश कुमार मगन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय रंजिनी शुक्ला तथा सिविल जज(सी0डि0) पीयूष त्रिपाठी व अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट- द्वितीय, महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया।