-मुख्य प्रवेश मार्ग के अभाव में हैंडओवर अटका

मिल्कीपुर। मिल्कीपुर स्थित ऐतिहासिक उधैला झील को इको-पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 3 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से तैयार इस पर्यटन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन परियोजना पूरी होने के कई माह बाद भी पर्यटन विभाग ने इसका हैंडओवर नहीं लिया है।
वहीं, मुख्य प्रवेश मार्ग का निर्माण न होने से व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो रही हैं। उधैला झील मिल्कीपुर के पांच राजस्व ग्राम—डिली गिरधर, अंजरौली, महुलारा, कुइंधना खुर्द और उधुई—के बीच लगभग 750 बीघा (74.756 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैली हुई है। इसकी लंबाई करीब 3330 मीटर है और यह तहसील मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर दूर मिल्कीपुर-रुदौली मार्ग पर स्थित है।
राजस्व अभिलेखों में यह तालाब के रूप में दर्ज है। इको पर्यटन विकास विभाग की इस परियोजना का निर्माण कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के माध्यम से जीएस कंस्ट्रक्शन, लखनऊ ने कराया। कार्य अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ था और नवंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन मार्च 2026 में निर्माण कार्य पूरा हुआ। इसके बावजूद अब तक पर्यटन विभाग ने स्थल का औपचारिक हैंडओवर नहीं लिया है।
पर्यटन स्थल पर मुख्य द्वार, टिकट काउंटर, कैंटीन, दो कॉटेज, एक फैमिली कॉटेज, पक्का घाट, शौचालय, वॉच टावर, किड्स प्ले एरिया, सेल्फी प्वाइंट, दो गजीबो, सोलर लाइटें तथा प्रवासी पक्षियों के लिए झील के बीच दो कृत्रिम माउंट विकसित किए गए हैं। कुछ दिन पूर्व मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने स्थल का निरीक्षण किया था। उस दौरान कार्यदायी संस्था ने मुख्य प्रवेश मार्ग के सीमांकन की मांग उठाई थी। सीडीओ ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक मार्ग का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
कार्यदायी संस्था के साइट इंजीनियर रोहित सिंह ने गुरुवार को बताया कि परियोजना पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 100 से 150 पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। फोटो और रील बनाने के दौरान कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है, जिसके चलते मौके पर मौजूद कर्मचारियों को पुलिस बुलानी पड़ती है। उन्होंने जल्द मुख्य मार्ग का निर्माण और हैंडओवर प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद जताई।