-कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित हुई संगोष्ठी
अयोध्या। इतिहास संकलन समिति, अयोध्या एवं कामता प्रसाद सुन्दरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर कारगिल विजय की शौर्य गाथा विषयक संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के जे.पी.एन. सभागार में किया गया। सर्वप्रथम राजीव मणि पाठक ने सभी अतिथियों का परिचय कराया तथा विषय वस्तु पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त कर्नल सी.पी. सिंह, इंचार्ज, ई.सी.एच.एस. पॉलीक्लिनिक, अयोध्या ने अपने उद्बोधन में कहा कि कारगिल विजय भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्र के प्रति सर्वाेच्च समर्पण का गौरवपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों का त्याग प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है तथा युवाओं को उनके जीवन से राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीराम वल्लभाकुंज, जानकीघाट के अधिकारी राजकुमार दास ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्ररक्षा में बलिदान देने वाले वीरों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य आत्मविश्वास और अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। संगोष्ठी में विशिष्ट अभ्यागत के रूप में डॉ. विक्रमा प्रसाद पाण्डेय, माननीय महानगर संघचालक तथा प्रो. दानपति तिवारी, प्राचार्य, साकेत महाविद्यालय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, एकता और अखंडता का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखते हुए देश निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। संगोष्ठी में कारगिल युद्ध के विभिन्न आयामों, भारतीय सेना की वीरता, रणनीतिक कौशल तथा शहीदों के अद्वितीय बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। डॉ. आनन्द दूबे ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. असीम त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर प्रो. उपमा वर्मा, प्रो. कविता सिंह, प्रो. शिवकुमार तिवारी, प्रो. मनीष कुमार सिंह, डॉ. कनक बिहारी पाठक, डॉ. रामलाल विश्वकर्मा, राजा रस्तोगी आदि प्राध्यापकों सहित एन.सी.सी. कैडेट्स उपस्थित थे।