-सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ाता है मेन्टल-रेजीलिएंस, नींद है ब्रेन बैटरी चार्जर

अयोध्या। दमखम, जोश व जज्बे के लिए जिम्मेदार मनोरसायन डोपामिन व मूड स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन का काम्बिनेशन
मानसिक-लचीलापन या मेन्टल-रेजीलिएंस विकसित कर चुनौतियों और मुश्किलों से उबरने की क्षमता विकसित करता है। बिना शिथिल हुए मानसिक रूप से शान्त, संयमित व चपल रहने के लिये गुणवत्तापूर्ण नींद पहली प्राथमिकता है।
नींद से ब्रेन-बैटरी चार्ज होकर स्ट्रेस-सेंसर अमिग्डाला को शांत कर नयी चुनौतियों के लिये पुनः तैयार हो जाता है, जिससे व्यक्ति का मूड स्ट्रेस के नकारात्मक रूप डिस्ट्रेस यानि हताशा में न जाकर इसके सकारात्मक रूप यूस्ट्रेस यानि प्रेरक-ऊर्जा में बदल कर यूफोरिया या आनंद में परिवर्तित हो जाता है। मूड स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन, रिवॉर्ड हार्मोन डोपामिन,साइकिक-पेन रिलीवर हार्मोन एंडोर्फिन व लव-हार्मोन ऑक्सीटोसिन नामक बिग फोर हैप्पी-हार्मोन्स का मनो-लचीलापन विकसित होने में अहम रोल है।
इन हार्मोंन से ब्रेन-सॉफ्टवेयर रिफ्रेश होता रहता है जिससे तनाव,द्वन्द,कुंठा व मनोथकान से उत्पन्न स्ट्रेस-हार्मोन कोर्टिसाल व एड्रेनिल उदासीन होता है। उदासी, थकान, अनमनापन, अनिद्रा, उलझन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा,नशाखोरी,ओवर-थिंकिंग,शक-वहम, ओसीडी, आत्मघाती या परघाती विचार, परिवार-कलह आदि बनी रहने पर मनोपरामर्श अति लाभकारी होता है।
आर्मी पब्लिक स्कूल सभागार में आयोजित मेन्टल रेजिलिएंस वर्कशॉप में जिला चिकित्सालय के माइंड मेंटर डा आलोक मनदर्शन ने यह बातें कही। कर्नल तुषार श्रीवास्तव की अध्यक्षता व प्रिंसिपल डा धीरज श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित कार्यशाला का संचालन आकृति माखेजा ने किया जिसमे सभी शिक्षक व स्टाफ उपस्थित रहे।