अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 28वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की अच्छाइयां ही नहीं प्रमुख कमियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि उन्हें अभी सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने परिसर में जहां 27 छात्रावासों में आठ छात्रावास बालिकाओं के लिए बताया वही छात्रावासों में वाशिंग मशीन व वाई फाई जैसी आवश्यक सुविधाओं का ना होना भी बताया। छात्रावास के मेस में किचन की सफाई सुधारने की आवश्यकता बताया तथा घटिया पनीर , मसाला ना इस्तेमाल कर स्वास्थ्य की दृष्टि से ब्रांडेड ही प्रयोग करने की भी सलाह दी।
छात्रावास में छात्र टू व्हीलर रखते हैं जिन्हें शिकायत है कि अनियमित रूप से पार्क भी करते हैं। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। परिसर में जनरल स्टोर की आवश्यकता को देखते हुए स्टोर खोलने तथा दवा की शाप की आवश्यकता तथा किसान भवन के छात्रावास के मेस में नॉनवेज बनने की शिकायत भी उन्होंने किया। सभी छात्रावासों की सफाई सुधारने तथा नए निर्माण कार्यों की निगरानी करने पर ध्यान देने को कहा। स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर 2 घंटे ही आते हैं वहां दवा रखने व नियमित डॉक्टर की व्यवस्था करने को भी कहा। छात्रों की मांग परीक्षा के समय रविवार को भी पुस्तकालय खोला जाए। सभी कमियों को सुधारने की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक पाकर झूम उठे मेधावी

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में 28वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर 774 छात्र-छात्राओं को उपाधियां व 24 मेधावियों को 25 स्वर्ण पदक दिया गया। प्रदेश की कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल के हाथों स्वर्ण पदक पाकर सभी मेधावी खुशी से झूम उठे। पदक पाने के बाद छात्र-छात्राएं सेल्फी लेते नजर आए तो कोई पदक को चूमता हुआ नजर आया। सभी छात्र-छात्राओं ने एक दूसरे को बधाईयां दीं और अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लिया। कुलाधिपति स्वर्ण पदक 5, कुलपति स्वर्ण पदक 13 तथा विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक 7 मेधावियों को दिया गया।
दीक्षांत समारोह के अवसर पर स्नातक के तीन मेधावियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक व स्नातकोत्तर एवं पीएचडी के एक- एक मेधावियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक दिया गया। 13 मेधावियों को कुलपति स्वर्ण पदक दिया गया जिसमें स्नातक के सात, स्नातकोत्तर के पांच व पीएचडी का एक मेधावी छात्र शामिल है। इसी क्रम में स्नातक के छह व पीएचडी के एक मेधावी को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक दिया गया।
कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न महाविद्यालयों एवं मुख्य परिसर को मिलाकर स्नातक, परास्नातक एवं पीएचडी के कुल 774 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी गईं। जिसमें स्नातक के कुल 388, परास्नातक के 335 तथा पीएचडी के कुल 51 छात्र-छात्राओं को उपाधिय़ां दी गईं। दीक्षांत समारोह के दौरान 2025-2026 के उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्र को भारत सरकार के डिजी लॉकर में अपलोड कर दिया गया।
डा. सुप्रिया व डा. जगबीर को मिला उत्कृष्ट शिक्षक का अवार्ड
28वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने पहली बार शिक्षण कार्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा कार्य करने वाले शिक्षक डा. सुप्रिया व डा. जगबीर सिंह को भी उत्कृष्ट शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया। राज्यपाल ने पांच हजार रुपये पुरस्कार के रूप में भेंट किए। विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर शिक्षकों का साक्षात्कार किया था जिसके बाद उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार के लिए शिक्षकों का चयन किया गया।
कुलाधिपति ने किया आधा दर्जन पुस्तकों का विमोचन
कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल व अन्य अतिथियों ने 26वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर आधा दर्जन पुस्तकों का विमोचन किया। जिसमें स्मारिका, वार्षिक रिपोर्ट 2025-26, पूर्वांचल खेती सहित पांच पुस्तकें शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ जन भवन की तरफ से राज्यपाल ने स्कूली बच्चों को 200 पुस्तकें भेंट की।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने किया सम्मानित
दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बीच आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता छात्र-छात्राओं को कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने स्कूल बैग और फल देकर सम्मानित किया। वहीं दूसरी तरफ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आंगनबाड़ी किट देकर शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित किया।
राज्यपाल ने पांच प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित
28वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न जनपदों से पहुंचे पांच प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। जिसमें ऊषा सिंह को हस्तशिल्प कला एवं दलहन उत्पादन, जमील अहमद को औद्यानिक फसलों की खेती, सीप मोती का उत्पादन और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। किसान शबीना खातून को ड्रोन तकनीकी द्वारा कृषि विविधीकरण के क्षेत्र में व कुमारी हिमांशु को केले के रेशों से बनने वाले उत्पाद के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्यपाल ने अपने हाथों से सम्मानित किया
राज्यपाल ने कार्यकत्रियों को दिए आंगनबाड़ी किट
28वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर अमेठी और अंबेडकर नगर के पांच-पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अपने हाथों से आंगनबाड़ी किट प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए ट्राई साईकिल, किताबें, झूले वाले घोड़े, एजूकेशनल मैप, फल, बॉल आदि प्रदान किए।
कृषि समृद्ध होगी तो गांव और प्रदेश समृद्ध होगा, तभी बनेगा विकसित भारत : शाही

विशिष्ट अतिथि के तौर पर कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में युवा छात्र-छात्राएं सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और करोड़ों परिवार आज भी कृषि एवं इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं। कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारत की समृद्धि का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि खेत समृद्ध होगा तो गांव समृद्ध होगा, गांव समृद्ध होगा तो प्रदेश समृद्ध होगा और प्रदेश के समृद्ध होने से विकसित भारत का सपना साकार होगा। वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश की कृषि को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। इसमें युवाओं की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कृषि क्षेत्र में नई तकनीक, नवाचार और अनुसंधान को अपनाकर देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। मंत्री ने आईआईआरएफ रैंकिंग में कृषि विश्वविद्यालय को देश में सातवीं रैंक मिलने पर कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह सहित समस्त विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खाद्यान्न और पोषण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। यह हम सभी के लिए बड़ी चुनौती है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकार इन क्षेत्रों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों का कार्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान खोजना, नई और उन्नत किस्मों का विकास करना, किसानों की आय बढ़ाने वाली तकनीक विकसित करना तथा कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि युवा कृषि वैज्ञानिक और विद्यार्थी अनुसंधान को खेत तक पहुंचाकर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
किसानों एवं छात्र हित में कार्य सर्वोपरि- कुलपति

कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अपने प्रतिवेदन को सबके समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने विवि की उपलब्धियों को अवगत कराते हुए बताया कि पिछले दो महीनों में छात्रों एवं विश्व विद्यालय हित में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। हाल ही में कृषि तकनीकि सूचना केंद्र का जीर्णोद्धार कर किसानों की सुविधा एवं कृषि संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए किसान हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800 18 04 229 का शुभारंभ किया गया। हेल्पलाइन किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी। विभिन्न महाविद्यालय के 50 से अधिक वैज्ञानिकों की ड्यूटी लगाई गई जो किसानों को समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि किसान हित उनके लिए सर्वोपरि रहेगा।
कुलपति ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों ने अप्रैल से जून 2026 तक “खादों का संतुलित उपयोग” व “खेत बचाओ अभियान”के तहत कार्यक्रम आयोजित हुए। ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘किसान चौपाल’ में हिस्सा भी लिया। जुलाई 2026में 29 कैडेट्स को ‘सी’ सर्टिफिकेट एवं 53 कैडेट्स को ‘बी’ सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है।
छात्र शिकायत निवारण पोर्टल खोला गया तथा समस्त छात्रावासों में शिकायती पत्र बाक्स भी लगाए गए। ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ को लेकर पदयात्रा और शपथ दिलाई गई। छात्र/छात्राओ की सुरक्षा एवं देखरेख के लिए अधिकतर छात्रावासों में 24×7 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए।
कुलपति ने बताया कि कुलाधिपति के दिशा-निर्देशन में 28वें दीक्षांत के उपलक्ष्य में गोद लिए गए गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों के मध्य प्रतियोगिताएं और प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के बीच भाषण, चित्रकला, कहानी-कथन, काव्य-लेखन, निबंध लेखन, लोक नृत्य, पांरपिक खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कुलपति ने अपने प्रतिवेदन में इस वर्ष की प्राथमिकताओं से अवगत कराते हुए बताया कि विवि एवं संचालित महाविद्यालयों को आगामी पांच वर्षों के लिए आईसीएआर से मान्यता प्राप्त कराना प्राथमिकता रहेगी। शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को गति प्रदान करने हेतु वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरना, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप धान, दलहन एवं तिलहन जैसी फसलों की क्लाइमेट स्मार्ट एवं सहनशील प्रजातियों को विकास, किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से बागवानी फसलों तथा पशु एवं मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना उनकी प्राथमिकता होगी।
समृद्ध कृषि व्यवस्था से पूरा होगा विकसित भारत का सपना- औलख
विशिष्ट अतिथि के तौर पर समारोह को संबोधित करते हुए कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि विकसित भारत 2047 का संकल्प तभी साकार होगा जब हमारा किसान समृद्ध होगा, कृषि व्यवस्था आधुनिक होगी और कृषि शिक्षा अनुसंधान एवं नवाचार से निरंतर जुड़ी रहेगी। वर्तमान समय में कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इस बदलते परिवेश में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी शक्ति है। राज्यमंत्री औलख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “ श्री अन्न ” को वैश्विक पहचान दिलाने का जो अभियान प्रारंभ किया, उसने भारत की पारंपरिक फसलों को नया सम्मान दिलाया है। प्रदेश सरकार मोटे अनाज, दलहन एवं तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दीक्षांत में बच्चों ने बिखेरा लोक संस्कृति का रंग, तालियों से गूंजा सभागार

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 28वें दीक्षांत समारोह में स्कूली बच्चों ने अपनी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समारोह में लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों ने ‘बड़ा नीक लागे हमरा देशवा के माटी’ गीत पर पारंपरिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। प्रस्तुति इतनी आकर्षक रही कि सभागार में मौजूद अतिथि, शिक्षक और विद्यार्थी तालियां बजाने के साथ झूमने पर मजबूर हो गए।
इसके बाद बच्चों ने जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए काव्य गीत ‘पेड़वां लगाईं, पर्यावरण बचाईं… एहि में सबकर भलाई हो’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। गीत के माध्यम से बच्चों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, पर्यावरण को सुरक्षित रखने और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति में लोकभाषा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों की मासूमियत और शानदार प्रस्तुति से राज्यपाल भी भाव-विभोर नजर आईं। उन्होंने सभी बच्चों को चॉकलेट देकर दुलार किया और उनका हौसला बढ़ाया। दीक्षांत समारोह जैसे गरिमापूर्ण अवसर पर स्कूली बच्चों की इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में एक अलग ही रंग भर दिया।