-श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने व नए ट्रस्ट के गठन की किया मांग

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण एवं चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सोमवार को धर्मसेना प्रमुख एवं हिन्दुवादी नेता संतोष दुबे ने लगभग 76 पृष्ठों का लिखित साक्ष्य सौंपा। इससे पहले रविवार देर रात उन्होंने क्षेत्राधिकारी नगर कार्यालय में एसआईटी के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना बयान दर्ज कराया था। एसआईटी के सदस्यों ने उनसे उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था।
संतोष दुबे ने बताया कि उन्होंने आठ प्रमुख बिंदुओं पर दस्तावेजी साक्ष्य एवं विभिन्न व्यक्तियों के सार्वजनिक बयान जांच में शामिल करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि कई यूट्यूब चौनलों एवं मीडिया प्लेटफॉर्म पर संबंधित लोगों द्वारा दिए गए बयानों की भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
दुबे द्वारा क्षेत्राधिकारी नगर श्रेयश त्रिपाठी के माध्यम से एसआईटी को दिए गए लिखित साक्ष्यों में आरोप लगाया गया है कि राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के खदान मालिक दिलीप सिंह राठौर मंदिर निर्माण के लिए बिना किसी शुल्क के पत्थर उपलब्ध कराने को तैयार थे, लेकिन कथित कमीशनखोरी के कारण उनका प्रस्ताव अस्वीकार कर महंगे दामों पर पत्थर खरीदे गए। उन्होंने इस मामले की जांच कर अधिक भुगतान की गई धनराशि की वसूली की मांग की है।
साक्ष्यों में यूट्यूबर अभिषेक उपाध्याय को दिए गए दीनानाथ वर्मा के बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कथित रूप से 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दीनानाथ वर्मा एवं अनिल मिश्रा के बयानों का पालीग्राफिक टेस्ट कराने की मांग की है।
इसके अलावा महिपाल सिंह के एक लेख का हवाला देते हुए चंपत राय से जुड़े कथित पुराने प्रकरणों की भी जांच कराने तथा आवश्यक होने पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का अनुरोध किया गया है।
दस्तावेज में अयोध्या स्थित राम फकीरे मंदिर तथा राम निवास मंदिर से जुड़े संपत्ति एवं कब्जे के मामलों की जांच कराने, न्यायालय में लंबित मामलों के अभिलेखों को जांच का हिस्सा बनाने तथा मंदिरों से जुड़े कथित विवादों की पड़ताल करने की भी मांग की गई है। संतोष दुबे ने अपने साक्ष्यों में अयोध्या के ग्राम कोट रामचंद्र एवं सहनवांपुर स्थित भूमि खरीद में ट्रस्ट के धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर भूमि खरीदकर करोड़ों रुपये का नुकसान किया गया। उन्होंने इन मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने 16 और 19 जून 2026 को संबंधित अधिकारियों तथा 21 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को भी शिकायत भेजी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संतोष दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के बाद ट्रस्ट पर जनता का विश्वास कम हुआ है, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन के शहीद कारसेवकों के परिजनों को प्रतिनिधित्व दिया जाए।
साथ ही उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सूर्यवंशी हैं, इसलिए ट्रस्ट में कम से कम एक सूर्यवंशी क्षत्रिय प्रतिनिधि को भी स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने स्वयं लाठियां और गोलियां झेली हैं, इसलिए मंदिर से जुड़े कथित गबन के आरोप उन्हें अत्यंत पीड़ादायक लगते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।