-मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मंदिर में चढ़ावा चोरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं : तेज नारायण पांडेय
अयोध्या। समाजवादी पार्टी वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की है। बुधवार को सिविल लाइन स्थित शाने अवध होटल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। उसी निर्णय के तहत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास एवं मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी इस ट्रस्ट को सौंपी गई। का यह केवल एक ट्रस्ट नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आस्था और माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के विश्वास का प्रतीक है। ट्रस्ट ने लोगों के विश्वास को तोड़कर सर्वाेच्च न्यायालय का भी अपमान किया है । आज जिस प्रकार से श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं एवं लूट के गंभीर आरोप सामने आए हैं, उसने पूरे देश के श्रद्धालुओं को आहत किया है।
श्री पांडेय ने कहा कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि है, जहां से पूरी मानवता मर्यादा, त्याग, समर्पण और आदर्श जीवन का संदेश प्राप्त करती है। ऐसे पवित्र स्थान से यदि चढ़ावे की लूट और भ्रष्टाचार जैसी खबरें सामने आती हैं तो यह केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला विषय नहीं, बल्कि देश की आस्था पर भी गंभीर आघात है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
जब प्राथमिकी ही नहीं हुई तो एसआईटी जांच का औचित्य क्या है? जनमानस में यह चर्चा है कि केवल औपचारिक जांच से सत्य सामने नहीं आएगा। करोड़ों रामभक्तों का विश्वास तभी बहाल होगा जब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और कठोर जांच माननीय सर्वाेच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाएगी। महिपाल सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों तथा प्रस्तुत किए गए तथ्यों पर ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट और ठोस जवाब न आना भी अनेक सवाल खड़े करता है। यदि आरोप निराधार हैं तो उनका तत्काल खंडन होना चाहिए था। लेकिन लगातार बनी हुई चुप्पी जनसामान्य के मन में संदेह को और अधिक गहरा कर रही है।
हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि जिन ट्रस्टियों अथवा पदाधिकारियों पर आरोप लगे हैं उन्हें जांच पूरी होने तक उनके पदों से हटाया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सर्वाेच्च न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जाए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके और रामभक्तों की आस्था पर लगा यह कलंक मिट सके। इसके अतिरिक्त अयोध्या में नजूल भूमि को गलत तरीके से क्रय विक्रय किया है । और जिसमें पैसे की भारी लूट हुई है । आरोप लगाए जा रहे हैं कि ऐसी भूमि, जिसके क्रय-विक्रय पर कानूनी प्रतिबंध है, उसे विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से ट्रस्ट की परिसंपत्तियों में शामिल किया गया तथा श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर निर्माण हेतु दिए गए धन का उपयोग इन भूमि सौदों में किया गया।
यदि इन आरोपों में सत्यता है यह केवल वित्तीय अनियमितता का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों द्वारा नजूल भूमि के अधिग्रहण और उससे जुड़े भुगतान में भारी अनियमितताएं की गईं तथा अयोध्या के कई सार्वजनिक मार्गों और रास्तों को भी ट्रस्ट क्षेत्र में शामिल कर आम लोगों की आवाजाही प्रभावित की गई।
यदि इन आरोपों में तथ्य हैं तो यह न केवल जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है, बल्कि श्रीराम मंदिर और अयोध्या की गौरवशाली छवि को भी नुकसान पहुंचाने वाला विषय है। इसलिए इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायिक निगरानी में जांच कराकर सच्चाई देश के सामने लाई जानी चाहिए। पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने कहा कि प्रभु श्रीराम किसी व्यक्ति या संस्था के नहीं, पूरे राष्ट्र की आस्था के केंद्र हैं। उनकी आस्था से खिलवाड़ करने वालों को कानून के दायरे में लाकर कठोर दंड दिया जाना चाहिए।