-उद्घाटन के साथ निर्माण एवं गुणवत्ता पर उठे सवाल

मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में करीब 10.92 करोड़ रुपये की लागत से बने तरणताल का आखिरकार 19 साल बाद बुधवार को लोकार्पण कर दिया गया। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी क्रीड़ा परिसर में निर्मित इस आधुनिक स्विमिंग पूल का उद्घाटन प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित 400 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट का भी लोकार्पण किया गया।
तरणताल के उद्घाटन के साथ ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद शुरू हो गया है। परिसर में कई स्थानों पर टूटी टाइल्स, चिटकी फर्श और अधूरे निर्माण जैसी खामियां दिखाई दीं। उद्घाटन से पहले मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कई जगह दरारें और खराब निर्माण साफ नजर आया। इसे लेकर विश्वविद्यालय परिसर और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या अधूरे निर्माण का जल्दबाजी में केवल औपचारिक उद्घाटन कर दिया गया। जानकारी के अनुसार तरणताल परियोजना की शुरुआत वर्ष 2007-08 में हुई थी।
करीब 12 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यह परियोजना लगभग दो दशक तक अधूरी पड़ी रही। सूत्रों के मुताबिक निर्माण एजेंसी को लगभग 90 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका था, लेकिन कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। लंबे समय तक यह परियोजना फाइलों और अधूरे निर्माण तक सीमित रही। भाजपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2016-17 में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। इसके बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई गई और अब इसका लोकार्पण किया गया।
अधिकारियों का दावा है कि तरणताल छात्रों के उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति डॉ. पी.एस. प्रामाणिक, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। कृषि मंत्री ने कहा कि यह तरणताल छात्रों की फिटनेस, खेल भावना और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देगा।
दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने कृषि विवि में काटा हंगामा, सरकारी कार्य में बाधा व धमकी देने पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
मिल्कीपुर। आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर कुमारगंज पुलिस ने दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ सुशान्त श्रीवास्तव द्वारा थाना कुमारगंज पुलिस को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम जोरियम, तहसील मिल्कीपुर निवासी रविनाथ सिंह एवं हरिनाथ सिंह ने विश्वविद्यालय कार्यालय पहुंचकर कर्मचारियों पर दबाव बनाया और अभद्र व्यवहार किया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार रविनाथ सिंह, जो फसल अनुसंधान केंद्र घाघरा घाट बहराइच में पूर्व चपरासी रहे हैं, तथा हरिनाथ सिंह, जो कृषि विज्ञान केंद्र गोंडा में पूर्व प्रक्षेत्र परिचर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे निदेशक कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने संबंधित पटल सहायक पर एक अनापेक्षित कार्य कराने के लिए दबाव बनाया। पटल सहायक ने मामले की सूचना निदेशक प्रशासन को दी। इसके बाद दोनों व्यक्तियों को निदेशक कक्ष में बुलाकर समझाया गया कि उनका कार्य पहले ही निस्तारित किया जा चुका है। आरोप है कि इसके बावजूद दोनों आक्रोशित हो गए और उच्च स्वर में दुर्व्यवहार करने लगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दोनों ने सरकारी कार्य में बाधा डाली, गाली-गलौज की और विश्वविद्यालय परिसर से बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
निदेशक प्रशासन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इस प्रकार का व्यवहार दोनों व्यक्तियों द्वारा पूर्व में भी किया जा चुका है। मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस से सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की गई थी। शिकायती पत्र मिलने के बाद कुमारगंज पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पूरे मामले की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी चौकी प्रभारी कृषि विश्वविद्यालय उप निरीक्षक अभिषेक सिंह को सौंपी गई है।