-जलकल भवन बनेगा ‘परंपरा हेरिटेज बिल्डिंग’, पर्यटक सुविधा केंद्र और धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष जोर

अयोध्या। अयोध्या मंडल को धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन का और अधिक सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने कार्ययोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने गुरुवार को अयोध्या मंडल की पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत लगभग 110 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 41 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य अयोध्या सहित पूरे मंडल में धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं का समग्र विकास करना है।
बैठक में अयोध्या, अमेठी, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर की पर्यटन परियोजनाओं पर विचार किया गया। इनमें सबसे अधिक प्रस्ताव अयोध्या जनपद से जुड़े हैं। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास को अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय एक समग्र व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटक सुविधा केंद्र, संकेतक, पार्किंग और विरासत संरक्षण से जुड़े सभी कार्य आपस में समन्वित हों तथा जनप्रतिनिधियों को प्रत्येक चरण की जानकारी दी जाए। गुणवत्ता और दीर्घकालिक अनुरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
अयोध्या के ऐतिहासिक जलकल भवन को संरक्षित करते हुए उसे ‘परंपरा हेरिटेज बिल्डिंग’ के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर विशेष चर्चा हुई। यह भवन अयोध्या की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने वाला प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा। इसके अलावा श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के कार्यालय एवं पर्यटक सुविधा केंद्र की स्थापना, प्रमुख स्थलों पर पर्यटक संकेतक लगाने, लता मंगेशकर चौक के सौंदर्यीकरण तथा भारत माता मंदिर, बौरा बाबा मठिया, प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर और आशा देवी मंदिर के विकास के प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई।
अमेठी में महादेव शंकर मंदिर, वीर बाबा मंदिर, खाकी साहब उदासीन आश्रम, राम जानकी मंदिर और श्रीमत परमहंस आश्रम के विकास की योजनाओं पर चर्चा हुई। बाराबंकी में चंद्रपुरी आश्रम, नर्मदेश्वर मंदिर, श्री राम जानकी मंदिर, श्रीनाथ बाबा मंदिर और नीलकंठेश्वर मंदिर को पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने के प्रस्ताव रखे गए। वहीं सुल्तानपुर में जयसिंहपुर में बहुउद्देशीय सभागार तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास की योजना पर विचार किया गया। अंबेडकरनगर में श्रवण धाम में संग्रहालय दीर्घा, कैफेटेरिया तथा बाबा निहाल दास कुटिया सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर पर्यटक सुविधाएं विकसित करने के प्रस्तावों की समीक्षा की गई।
लोधेश्वर मंदिर विकास परियोजना की प्रगति संतोषजनक
बाराबंकी स्थित प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव मंदिर में लगभग 48.77 करोड़ रुपये की लागत से संचालित पर्यटन विकास परियोजना की प्रगति संतोषजनक पाई गई। यह परियोजना श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ लोधेश्वर मंदिर को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं अयोध्या में सरयू नदी पर विकसित किया जा रहा फ्लोटिंग रेस्टोरेंट दीपोत्सव से पहले संचालित किए जाने की तैयारी है। इसके शुरू होने से अयोध्या के रिवरफ्रंट पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को एक नया पर्यटन अनुभव उपलब्ध होगा।
संस्कृति विभाग की परियोजनाओं पर भी रहा विशेष फोकस
संस्कृति विभाग ने अंबेडकरनगर के रामलीला मैदान के सौंदर्यीकरण एवं नवीनीकरण तथा अयोध्या के पूरा बाजार में अमर शहीद जगदंबा प्रसाद पांडेय स्मारक एवं प्रवेश द्वार निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके साथ ही अयोध्या में निर्माणाधीन वैदिक शोध संस्थान और बाराबंकी में पद्मश्री बाबू के.डी. सिंह के पैतृक आवास को स्मारक संग्रहालय के रूप में विकसित किए जाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
धर्मार्थ कार्य विभाग के नौ प्रस्ताव पर हुई चर्चा
धर्मार्थ कार्य विभाग ने नौ महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इनमें अयोध्या में रामपथ और हवेली अवध के निकट पार्किंग सुविधाओं का विकास, विभिन्न धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण, अंबेडकरनगर के श्रवण क्षेत्र और पंचमुखी मंदिर का विकास तथा सुल्तानपुर के हनुमान धाम शांति आश्रम और प्राचीन बाबा महादेव धाम मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। इन योजनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए धार्मिक पर्यटन को और सुदृढ़ बनाना है।
इस बैठक में वर्ष 2023 से 2026 के बीच पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की कार्यदायी संस्थाओं के संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पूर्ण होने वाली परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शुरू होने वाली परियोजनाओं का भूमिपूजन संबंधित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ही कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि छोटी निर्माणाधीन परियोजनाओं को चार से पांच माह के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने नियमित स्थलीय निरीक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की सतत निगरानी तथा समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।