-सालों से विवि में जमे, कृषि शिक्षा-प्रसार ठप, डीन-डायरेक्टर पदों पर भी कब्जा
मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज में संबद्धीकरण के चलते कृषि, शिक्षा एवं प्रसार कार्य ठप होता जा रहा है। कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि ज्ञान केंद्रों के लिए नियुक्त वैज्ञानिक व शिक्षक कई वर्षों से विश्वविद्यालय मुख्यालय से संबद्ध हैं। अपने मूल तैनाती स्थलों से दर्जनों शिक्षकों का मोहभंग हो चुका है, जबकि डीन, डायरेक्टर और विभागाध्यक्ष पदों को सुशोभित करते हुए विश्वविद्यालयकर्मी कई वर्षों से जमे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन संबद्ध शिक्षकों को उनके मूल तैनाती कृषि महाविद्यालयों में वापस भेजने को लेकर पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। कार्रवाई के बजाय प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालकर अवैध रूप से संबद्ध शिक्षकों को प्रश्रय दिया जा रहा है। हालांकि प्रशासन बार-बार दावा करता है कि जल्द ही सभी शिक्षकों को मूल कॉलेज भेज दिया जाएगा।
कृषि विवि के अधीन कृषि महाविद्यालयों में नियुक्त सह प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों ने संबद्धीकरण के नाम पर बड़ा खेल किया है। ये शिक्षक वेतन तो अपने मूल तैनाती कृषि महाविद्यालय से आहरित कर रहे हैं, लेकिन अध्यापन कार्य करने के बजाय कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों में संबद्ध हैं। आजमगढ़ के कोटवा स्थित कृषि महाविद्यालय में वर्तमान में 400 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और करीब दो दर्जन शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति भी है। लेकिन वहां शिक्षा का कार्य चंद शिक्षकों के सहारे चल रहा है।
कीट विज्ञान विभाग में डॉ. समीर कुमार, मृदा विज्ञान में डॉ. राबिन चौधरी, उद्यान एवं वानिकी में डॉ. यश्मिता, क्रॉप फिजियोलॉजी में डॉ. आलोक सिंह तथा कृषि प्रसार में डॉ. एन.आर. मीणा व डॉ. पीयूषा सिंह की तैनाती है। किंतु इनका महाविद्यालय से मोहभंग हो चुका है। प्रभाव के बल पर ये सभी कुमारगंज विवि से संबद्ध हो गए हैं, जबकि वेतन कोटवा से ही उठा रहे हैं।
कृषि महाविद्यालय कोटवा के अधिष्ठाता डॉ. धीरेंद्र कुमार सिंह लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन से संबद्धीकरण निरस्त कर शिक्षकों को वापस भेजने का पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। विवि में शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और संबद्ध शिक्षकों के लिए कोई पद रिक्त नहीं है। ऐसे में इनका विवि से संबद्ध रहना औचित्यहीन है।
यही हाल कृषि ज्ञान केंद्रों का है। तकनीकी कृषि के प्रचार-प्रसार के लिए तैनात कई कर्मी कार्यभार ग्रहण के बाद 20 वर्षों से विवि मुख्यालय से संबद्ध हैं और कृषि ज्ञान केंद्रों का मुंह तक नहीं देखा। ऐसे ही लोग विवि में डीन व डायरेक्टर जैसे पदों पर जमे हैं। वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर को विभागाध्यक्ष व अधिष्ठाता की जिम्मेदारी दी गई है।