-राम मंदिर की व्यवस्था पर उठाए सवाल, संतों को सौंपी जाए मंदिर की व्यवस्था

अयोध्या। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को अयोध्या हनुमानगढ़ी में हनुमंतलला का दर्शन किया।
इसके पूर्व अयोध्या धाम बस अड्डा स्थित सागर पैलेस में 81 दिवसीय गविष्ठि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा के दौरान आयोजित प्रेसवार्ता में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर की वर्तमान व्यवस्था, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रदेश की गौशालाओं की स्थिति को लेकर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मौजूदा परिस्थितियां संत समाज के लिए चिंता का विषय हैं और मंदिर की व्यवस्था संत-महंतों की देखरेख में होनी चाहिए।
शंकराचार्य ने दावा किया कि राम जन्मभूमि विवाद में मुकदमा रामलला विराजमान के नाम से लड़ा गया था, लेकिन अब मूल प्रतिमा को हटाकर दूसरी प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। उन्होंने इसे रामलला विराजमान का घोर अपमान बताते हुए कहा कि जिन रामलला के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ, उन्हें उचित स्थान नहीं मिला।

उन्होंने अस्थायी मंदिर में स्थापित ज्योति पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वहां कृत्रिम व्यवस्था कर श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अभी राम मंदिर नहीं, कार्यालय जैसा माहौलश् शंकराचार्य ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण अभी पूर्ण नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में मंदिर संतों के बजाय अन्य संस्थाओं के प्रभाव में संचालित हो रहा है।
उनका कहना था कि जब मंदिर की व्यवस्था संतों के हाथों में होगी और शास्त्रसम्मत पूजा-पद्धति लागू होगी, तभी वह स्वयं रामलला के दर्शन करने जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आम संतों को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलता, जबकि कुछ विशिष्ट लोगों को विशेष अनुमति दी जाती है।
प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरि पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें शंकराचार्य का अपमान करने का अधिकार नहीं है और इस संबंध में नोटिस भेजा जाएगा। उन्होंने अयोध्या समेत पूरे उत्तर प्रदेश की गौशालाओं की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। उनका आरोप था कि कई गौशालाओं में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक है और पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने कहा कि गो-रक्षा और गौशालाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर ही उनकी गविष्ठि यात्रा निकाली जा रही है।