-रक्षाबंधन में वचन तब सार्थक हो जाएगा जब समाज में बहन बेटियां के मन में सुरक्षा का विश्वास जागृत हो जाएगा : डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी

अयोध्या। श्रावणी पूर्णिमा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विवेकानंदनगर का रक्षा बंधन उत्सव सुभाषनगर स्थित आर्य समाज यज्ञशाला सभागार में आयोजित हुआ। महानगर सह व्यवस्था प्रमुख विवेक अग्रवाल के एकल गीत एवं सुनील कुमार के अमृत वचन के बाद मुख्य वक्ता वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने सनातन पर्व रक्षा बंधन की सामयिक प्रासंगिकता को पौराणिक एवं ऐतिहासिक संदर्भों से पुष्ट करते हुए कहा भारत उत्सवधर्मी देश है यहां की जीवनपद्धति आध्यात्मिक इसलिए वैज्ञानिक भी है, और प्रकृति प्रवृत्ति गुणोपासक है, इसलिए हम राम या कृष्ण नाम के किसी व्यक्ति को नहीं अपितु समाज राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन आदर्शों गुणों के ईश्वर की उपासना करते हैं।
युगों बीत जाने के बाद भी हमारी चेतना चिंतन और आस्था निरंतर है , क्योंकि हमारे मूल स्वभाव में भौतिक पूजा नहीं तात्विक उपासना है, यही कारण है पंथ संप्रदाय बनते हैं पद्धतियां विकसित होती हैं किंतु भारत की मूल प्रवृत्ति के दर्शन सभी जगह होते हैं। डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा हजारों वर्षों की पराधीनता झेल चुके भारत के स्वतंत्र होने का पूर्वाभास कर चुके चिकित्सक डॉ हेडगेवार ने देशवासियों में इसी स्वाभिमान, ज्ञान आत्मबल के जागरण के लिए संघ की स्थापना की और किसी व्यक्ति को नहीं शाश्वत, सनातन, ज्ञान, चिंतन, वैराग्य, त्याग, समर्पण शौर्य के सनातन प्रतीक भगवा ध्वज को तात्विक गुरु के रूप में स्वीकार किया। जब हम इसे प्रणाम करते हैं और रक्षासूत्र बांधते हैं तो भौतिक दिखने वाली यह क्रिया हमें हमारी संस्कृति की गुरुत्व का बोध कराती है, हमारा संकल्प दृढ़ होता है, और तेज ज्ञान , शौर्य समर्पण, ध्येयनिष्ठा ,अजेय आत्मबल, निरंतरता की प्रेरणा मिलती है।
संघ जब अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है तो बदलती परिस्थितियों में चुनौतियों ने भी अपने स्वरूप बदले हैं, किंतु हमारे समाज की संगठित शक्ति से आए परिवर्तन और स्वीकार्यता का साक्षी आज समस्त विश्व है। वर्तमान समय भी हम पर डिजिटल मीडिया माध्यमों से सांस्कृतिक घात हो रहे हैं, इसलिए हमें अपनी पीढ़ियों को इस मानसिक पराधीनता में नहीं फंसने देना है, अतः व्यक्तिगत पारिवारिक सामाजिक स्तर पर संवाद बढ़ाना होगा, अपनी सांस्कृतिक विरासत और पर्वों को मौज मस्ती के अवसर एवं बाजारवाद के आवरण से बचाना चाहिए।
संवाद में मौलिक चिंतन, वैज्ञानिक व्यवहारिक तथ्य तर्क सभी होंगे तो ग्राह्यता स्वीकार्यता बढ़ेगी, साथ ही स्व का बोध होगा। यह भूमि, जल, वायु, आकाश, अग्नि , पर्यावरण, यहां के लोग जीव सभी हमारे हैं जब यह स्व बोध होगा तभी हमारे कर्तव्य के प्रति निष्ठा जागृत होगी और एक जागरूक नागरिक के रूप में हमारा प्रत्येक कार्य, उद्यम भारत को परमवैभव तक के जाने वाला होगा। डॉ उपेन्द्र ने उपस्थित युवाओं से आह्वान किया रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ तब होगा जब हमारे समाज की प्रत्येक नारी की रक्षा का वचन आम विश्वास बन जाएगा।
बौद्धिक प्रमुख रतन राजपाल ने उपस्थित बंधुओं और वक्ता का आभार व्यक्त किया।सभी ने एक दूसरे को राखी बांधी। गौ, पर्यावरण,संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रेम प्रकाश नगर कार्यवाह, सुनील कुमार सह नगर कार्यवाह, संजय रस्तोगी बस्ती प्रमुख फतेहगंज, उत्पल अड्डी बस्ती प्रमुख झारखंडी, , राजीव जैन कुटुंब प्रबोधन प्रमुख, श्री राम केसरवानी , आर्य समाज के पुरोहित , मुकेश श्रीमाली सहित समाज के प्रबुद्धजन एवं युवा उपस्थित रहे।