-राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल
अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज एक बार फिर विवादों में है। मेडिकल कॉलेज के 12 नंबर वार्ड में भर्ती मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया है कि शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक कोई डॉक्टर मरीज को देखने नहीं पहुंचा। परिजन लगातार स्टाफ से गुहार लगाते रहे, लेकिन इलाज के बजाय उन्हें उपेक्षा और अभद्रता मिली।
आरोप है कि जब मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों ने विरोध जताया और वीडियो बनाना शुरू किया, तो वहां मौजूद कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मोबाइल फोन छीन लिया। इतना ही नहीं, वीडियो डिलीट करने और हाथापाई करने की कोशिश तक का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद इमरजेंसी वार्ड में देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बनता जा रहा है।
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए मेडिकल कॉलेज में अगर मरीज घंटों डॉक्टर का इंतजार करे और सवाल पूछने पर तीमारदारों के साथ दुर्व्यवहार हो, तो फिर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों का क्या मतलब रह जाता है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर कहां थे? अगर परिजनों के आरोप सही हैं, तो मोबाइल छीनने और वीडियो डिलीट करने का अधिकार किसने दिया? क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? अयोध्या की जनता अब जवाब चाहती है, क्योंकि अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को अपमान नहीं, संवेदनशील व्यवहार चाहिए।