-हैप्पी-हार्माेन बढ़ाते हैं आत्मविश्वास की टोन, घ्सचेत व्यवहार लाता है सकारात्मक बदलाव

अयोध्या। स्वस्थ व्यवहार के जागरूक अभ्यास से कुछ ही हफ्तों में दिमाग के सॉफ्टवेयर में इस व्यवहार की प्रोग्रामिंग हो जाती है जिसे न्यूरोसाइंस में न्यूरो प्लास्टिसिटी या ब्रेन- रिवायरिंग कहा जाता है। इस मनोक्रिया का उपयोग संज्ञान व्यवहार उपचार यानि काग्निटिव बिहैवियर थिरैपी-सीबीटी में रुग्ण मनोवृत्तियों की स्वष्थ मनोक्रियाओ से प्रतिस्थापन में की जाती है।
मनोरसायन सेरोटोनिन मेन्टल-रेजीलिएंस विकसित कर चुनौतियों से लड़ने की क्षमता विकसित करता है, पर इसकी कमी होने पर स्ट्रेस जनित एंग्जाइटी, अवसाद,एंगर,सब्सटेंस यूज डिसऑर्डर, ओसीडी, इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर, कंडक्ट डिसऑर्डर,फैमिली कान्फ्लिक्ट व रिस्क बिहैवियर आदि मनोविकार हो सकते हैं।
गुणवत्तापूर्ण नींद से ब्रेन-बैटरी चार्ज होकर स्ट्रेस-सेंसर अमिग्डाला को शांत कर नयी चुनौतियों के लिये पुनः तैयार होती है, जिससे स्ट्रेस नकारात्मक रूप डिस्ट्रेस यानि हताशा में न जाकर सकारात्मक रूप यूस्ट्रेस यानि प्रेरक-ऊर्जा में बदल कर यूफोरिया या आनंद में परिवर्तित हो जाता है। मूड-स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन, रिवॉर्ड-हार्मोन डोपामिन,साइकिक-पेन रिलीवर हार्मोन एंडोर्फिन व लव-हार्मोन ऑक्सीटोसिन से ब्रेन सर्किट संवर्धित होती है जिससे तनाव,द्वन्द,कुंठा व मनोथकान दूर होता है। पैका स्किल्स सभागार में आयोजित मेंटल-हेल्थ व्याक्खान सत्र में डा आलोक मनदर्शन ने यह बातें कही। संकर्षण शुक्ला व सरिता उपाध्याय के संयोजन में आयोजित सत्र का संचालन दीपक पाण्डेय ने किया।