– कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने किया टोल-फ्री नंबर 1800 18 04 229 का शुभारंभ, किसानों की समस्या का किए समाधान

अयोध्या।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों की सुविधा एवं कृषि संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंगलवार को किसान हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800 18 04 229 का शुभारंभ किया। उद्घाटन के बाद कुलपति ने स्वयं हेल्पलाइन पर किसानों से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और वैज्ञानिकों के माध्यम से उनके समाधान भी बताए।
कुलपति ने कहा कि यह हेल्पलाइन किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी। इसके जरिए किसानों को फसल उत्पादन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि अभियांत्रिकी, मृदा परीक्षण, बीज, कीट एवं रोग प्रबंधन सहित कृषि के विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सलाह समय पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाना भी है।
किसानों को सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए कृषि तकनीकी सूचना केंद्र (एटिक) को पुनः सक्रिय किया गया है। प्रसार निदेशालय स्थित एटिक भवन का जीर्णोद्धार कर उसे आधुनिक सूचना एवं परामर्श केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां कृषि विशेषज्ञों की नियमित ड्यूटी निर्धारित की गई है, जिससे किसानों को एक ही स्थान पर तकनीकी परामर्श, कृषि योजनाओं की जानकारी तथा वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
एटिक को सुदृढ़ बनाने और किसान हेल्पलाइन शुरू करने का उद्देश्य किसानों तक विश्वविद्यालय की तकनीकों को सीधे पहुंचाना तथा आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना है। इससे कृषि तकनीकों का व्यापक प्रसार होगा और किसानों को समय पर विशेषज्ञ सलाह मिलने से खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी।
निदेशक प्रसार डॉ. रामबटुक सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि कुलपति के प्रयासों से एटिक की व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं और अब किसानों को कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध हो गई है।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक , वित्त नियंत्रक, वरिष्ठ प्रसार अधिकारी, अभियंता, वैज्ञानिक एवं आसपास के किसान उपस्थित रहे।