-परीक्षार्थी व परिज़न रखें विश्वास व संयम, बिहैवियर-स्यूटिकल से करें आघात-शमन
अयोध्या। मेडिकल प्रवेश की राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा नीट- यूजी 26 पेपर-लीक अभ्यर्थियों व परिजनों में आक्रोशयुक्त-मनोआघात का कारण बन गया है। इस मनोदशा से ग्रसित होने पर क्रोध,चिड़चिड़ापन,अनिद्रा, सरदर्द, बदनदर्द, हताशा, निराशा, अविश्वास,उग्रता, नींद में खलल, भयानक सपने, स्लीप ट्रेमर आदि जैसे लक्षण दिखायी पड़ सकते हैं जिसे मनोविश्लेषण की भाषा में सामूहिक- मनोआघात या कलेक्टिव-ट्रामा कहा जाता है। इस मनोदशा में
मन मे रस्सा कसी होने लगती है जिससे अनिद्रा, बेचौनी, भूख में कमी, चिड़चिड़ापन, उदासी, क्रोध, उल्टी, पेटदर्द ,मूर्छा, गुमशुम, पढ़ाई में अरुचि, हीन भावना, पलायनवादी या रिस्क बिहैवियर जैसे लक्षण भी दिख सकते है । जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन के अनुसार इस मनोआघात से ग्रसित अभ्यर्थी के मन मे नकारात्मक व अनचाहे विचार व मनोभाव बार बार आ सकते है। मनोद्वन्द घड़ी के पेंडुलम की तरह कुआं तथा खाई जैसी मनोस्थिति दिखाने लगता है।
सलाह –
ऎसे में परिजन व अभिभावक का रोल अहम है कि वे विश्वास व मनोसंयम की पुनर्स्थापना वाले वातावरण बनाएं तथा अति अपेक्षापूर्ण व तुलनात्मक आंकलन कदापि न करे। अभ्यर्थी की गतिविधियों पर मित्रपूर्ण व सजग पैनी नज़र रखे तथा कुछ भी असामान्य व्यवहार दिखने पर परामर्श अवश्य ले। परीक्षार्थी अपने मन को द्वंद की दशा से सतर्क रखें तथा आत्मग्लानि या अवसादग्रस्त दशा के प्रति जागरूक रहें। आठ घन्टे की नींद अवश्य लें और अपनी योग्यता पर भरोसा रखते हुए मानसिक संतुलन पे फोकस करें तथा समस्या के बने रहने पर मदद अवश्य लें। इस व्यवहारिक जागरूकता को बिहैवियर-स्यूटिकल कहा जाता है।