-निद्रा करती है ब्रेन सॉफ्टवेयर रिसेट, हाई ब्रेन-वेव लाती लाती है एंग्जायटी व स्ट्रेस

अयोध्या। अच्छी नींद व ध्यान से मूड-स्टेबलाइज़र हार्मोन सेराटोनिन व मनोशांत हार्मोन गाबा में अभिवृद्धि होने से स्ट्रेस-हार्मोन कार्टिसाल व एड्रेनलिन में कमी आती है। निद्रा व मेडिटेशन अवसाद, उन्माद,चिंता घबराहट, टेंशन-हेडेक, अनिद्रा,फोबिया आदि का शमन करती है । साथ ही विभिन्न मनोशारीरिक समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़, पेट की खराबी व क्रोनिक फटिग सिंड्रोम आदि में लाभदायक होती है।
मनोगतिकीय विश्लेषण:
ध्यान विभिन्न आवृत्ति की मनोतरंग पैदा करता है जिसे ब्रेन-वेव रिकॉर्डिंग या इलेक्ट्रो-इनसिफैलोग्राम या ब्रेन-मैपिंग से जांचा जा सकता है । मनोचिकित्सा में चार तरह के ब्रेन-वेव संदर्भित है,जिसे बीटा ,अल्फा, थीटा व डेल्टा नाम से जाना जाता है। बीटा-वेव सबसे अधिक फ्रिक्वेंसी की होती है,जो तनाव की मनोदशा तथा अल्फा-वेव मध्यम फ्रिक्वेंसी की होती है, जो सामान्य अवस्था को प्रदर्शित करती है । अल्प-ध्यान की अवस्था में थीटा-तरंग मिलती जो कि निद्राचक्र के स्वप्न-समय मे भी दिखती है। गहन-ध्यान या डीप-मेडिटेशन की अवस्था में सबसे धीमी ब्रेन-वेव डेल्टा मिलती है। अवसाद व चिंता-विकार के रोगियो का इलाज अब आईटीबीएस यानि “इंटरमिटेंट थीटा बर्स्ट स्टिमुलेशन” से किया जा रहा है, जिसमे मरीज के ब्रेन में शान्त-तरंग थीटा को कृत्रिम रूप से भेजा जाता है जिसे ब्रेन-वेव थिरैपी कहा जाता है।
सलाह :
मेन्टल डिसऑर्डर के दो-तिहाई रिस्क ग्रुप में आने वाले वर्ग किशोर व युवाओं में एकेडमिक-प्रेशर,कैरियर-स्ट्रेस, जॉब-डिमांड, फैमिली- कांफ्लिक्ट, लव-लाइफ स्ट्रेस, नशे की लत, डिजिटल लत, अवसाद, उन्माद, चिंता विकार आदि के प्रति जागरूकता व परामर्श से मनोस्वास्थ्य की पुनर्स्थापना होती है। शर्म, संकोच व अज्ञानता के कारण अस्सी फीसदी से अधिक लोग इलाज से वंचित हो नारकीय जीवन जीने या आत्मघाती कृत्य कर बैठते है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर पर महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय अयोध्या में आयोजित सत्र में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने यह बातें कही। प्रति कुलपति प्रो राजीव मिश्र की अध्यक्षता व डा बीना के संयोजन में आयोजित सत्र में फैकल्टी व स्टूडेंट्स ने प्रतिभाग किया।