सरकारी अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं का टोटा

आम मरीजों को नहीं मिल पा रहा पैरासीटामाल

अयोध्या। सूबे की योगी सरकार सरकारी अस्पतालों में भरपूर दवा होने का लाख दावा करती हो परन्तु स्थिति एकदम विपरीत है। सरकारी जिला चिकित्सालय में हालात यह हैं कि दर्द निवारक दवा पैरासीटामाल तक आम मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सीएमएस द्वारा एलपी करके आवश्यक दवाएं जो खरीदी जा रही हैं वह भी केवल वीआईपी खेमे को नसीब हो पा रही हैं।

एंटी रैबीज वैक्सीन महीनों से अनुपलब्ध

जिला चिकित्सालय में कई महीनों से बेटाडीन, डायक्लोजेल , आयरन टेबलेट, डायग्लोपैनिप, पेंटापेराजोल, सिटिजन, आई व ईयर ड्राप, डोटाबेरिन, डेक्कसाडेरीफाइलीन, पैरीनाम, सिल्वर सल्फा डाइजिन, डाईजीपॉम, अनुपलब्ध है। यही नहीं निडिल व होल्डर भी मरीजों को बाहर से लेना पड़ रहा है। एंटी रैबीज वैक्सीन महीनों से नहीं है जिसके कारण कुत्ता और बंदर के काटने पर मरीज सरकार द्वारा दी जा रही इस निःशुल्क सुविधा से भी वंचित हो रहे हैं। जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन मशीन की सुविधा थी जो बीते 8 अगस्त 2017 से खराब है। मरीजों को प्राइवेट सेंटरों से सिटी स्कैन करवाना पड़ रहा है और इसके लिए ढ़ाई हजार से तीन हजार तक प्राइवेट सेंंटर वसूली करते हैं। मेडिकल स्टोर से मरीज के लिए तीमारदार जो दवा खरीदता है उसपर भी डाक्टर का कमीशन तय है। मरीज से डाक्टर खुद कहता है कि यदि ठीक होना है तो बाहर की दवाएं खाना पड़ेगा क्योंकि अस्पताल में आवश्यक दवाएं हैं ही नहीं। इस सम्बन्ध में जब जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.के. राय से बात की जाती है तो वह कहते हैं कि दवाएं सभी उपलब्ध हैं यदि उनका दावा सही मान भी लिया जाय तो मरीज को दर्द निवारक पैरासीटामाल व एंटी एलर्जी सिटजिन तक नसीब क्यों नहीं हो रही है? यही नहीं कान और आंख के मरीजों को जो एक मात्र ड्राप मिलता भी था वह भी स्टोर में उपलब्ध नहीं है। सरकारी अस्पताल में दवा न पाने से मरीजों और तीमारदारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

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