-यौन-उत्पीड़न का होता है रुग्ण-मनोवृत्ति कनेक्शन, यौन उत्पीड़न कृत्य का संज्ञान लेगी चिकित्सालय समिति
अयोध्या। महिला सहकर्मी से अश्लील चैटिंग व बातें, पोर्नोग्राफिक-कंटेंट साझा करना, अश्लील इशारे व व्यंग्य, अशोभनीय मजाक, रास्ते में पीछा करना, चोरी-छिपे ताक-झाँक, गुप्त वीडियो या फोटो लेना, बैड-टच, बॉडी-शेमिंग आदि कृत्य कार्यस्थल महिला यौन-उत्पीड़न की श्रेणी में आतें हैं। इतना ही नही, बेवजह काम मे रोक-टोक, कमी-निकालना व जलील करना व अन्य मनोसंताप को बढ़ाने वाले व्यवहार भी उत्पीड़न के अंतर्गत आते हैं।
कार्यक्षेत्र में बढ़ती महिलाओं की भागेदारी के बीच कार्य-क्षेत्र मे लिंग आधारित भेदभाव व यौन- उत्पीड़न मनोवृत्तियों की रोकथाम व निवारण के लिये पीओएसएच-प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल-हरासमेंट ऑफ वीमेन इन वर्क-प्लेस एक्ट -2013 लागू किया गया। इसके तहत 10 या इससे अधिक क्षमता के प्रत्येक प्राइवेट व सरकारी संस्थान में महिला यौन- उत्पीड़न शिकायत निवारण के लिये आतंरिक शिकायक समिति का गठन अनिवार्य है जिसमें महिला सदस्य भी हों। इतना ही नही, यौन उत्पीड़न शिकायत के लिये अब ऑनलाइन पोर्टल भी शुरु किया गया है जिसे शी-एसएचई पोर्टल कहा जाता है।
महिला यौन-उत्पीड़न के प्रमुख हथकंडो में यौन-रिश्वत यानि लालच देकर उत्पीड़न व यौन-भयादोहन यानि डरा धमकाकर उत्पीड़न प्रमुख हैं। व्यक्तित्व-विकार, मूड-विकार, नशा-विकार व अन्य मनोसामजिक विकृति से ग्रसित लोगों में यौन-उत्पीड़न की मनोवृत्ति होने की सम्भावना अधिक होती है। स्वस्थ-व्यक्तित्व व स्वस्थ कार्यस्थल- संस्कृति में ऐसी गतिविधियों के लिए कोई जगह नही होती।
जिला चिकित्सालय मे आयोजित कार्यस्थल में महिला यौन उत्पीड़न रोधी अधिनियम यानि प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हरसमेंट ऑफ वीमेन एट वर्क प्लेस- पाश जागरूकता कार्यशाला में यह बातें मनोपरामर्शदाता व जिला चिकित्सालय के महिला सुरक्षा समिति के सदस्य डा आलोक मनदर्शन ने बतायी। आज पुनर्गठित सात सदस्यीय समिति चिकित्सालय में यौन शोषण की घटनाओ की जांच, मनोपरामर्श व आरोप सिद्ध प्रक्रिया की इंटरनल नोडल बॉडी के रूप में कार्य करेगी।