हंसी-ठहाका भी मन का आवश्यक भोजन : डॉ. आलोक मनदर्शन

by Next Khabar Team
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-हंसी तनाव के विरुद्ध शरीर का एक प्राकृतिक डिफेंस मैकेनिज्म: प्रो. नीलम पाठक


अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव महिला छात्रावास के सभागार में आयोजित मनो जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ के तौर पर मनोचिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन जिला अस्पताल अयोध्या एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय पाठक रहे।

डॉ. मनदर्शन ने बताया कि चाय व काफी में मौजूद तत्व कैफीन ब्रेन रिवॉर्ड हार्माेन डोपामिन को बढ़ा कर सुकून व चुस्ती का अहसास तथा कार्य शक्ति व प्रेरणा में वृद्धि करते है। उन्होंने बताया कि हंसी-ठहाका भी मन का आवश्यक भोजन है तथा इसकी कमी मानसिक, भावनात्मक व मनोशारीरिक समस्याओं को उत्प्रेरित कर सकती है। खुलकर हंसने से स्ट्रेस हार्माेन कोर्टिसाल कम तथा स्ट्रेस-रिलीवर हार्माेन में वृद्धि होती है। तनाव-युक्त भागदौड़ भरी दिनचर्या में कुछ पल हंसने की अनिवार्यता के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से वर्ल्ड लाफ्टर- मंथ मई के प्रथम रविवार से शुरु होकर पूरे एक माह तक मनाया जाता है।

इसकी शुरुआत डॉ. मदन कटारिया द्वारा की गयी। हर दिन 10 से 15 मिनट की हंसी अति आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने कहा कि खुलकर हंसना हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक और मुफ्त मैडिसिन की तरह काम करता है। प्रो. पाठक ने कहा कि जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर श्फाइट या फ्लाइटश् मोड में चला जाता है, जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्माेन्स बढ़ जाते हैं। हंसने से तुरंत यह चक्र टूटता है। हंसी तनाव के विरुद्ध शरीर का एक प्राकृतिक डिफेंस मैकेनिज्म है। यह बिना किसी साइड इफेक्ट के तुरंत हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करती है। इसलिए, व्यस्त दिनचर्या में भी खुलकर हंसने के बहाने ढूंढना बेहद जरूरी है।

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प्रो. संजय पाठक ने कहा कि छात्र जीवन हमारे पूरे जीवन की सबसे ऊर्जावान, रचनात्मक और महत्वपूर्ण अवस्था है। यह वह समय है जब आप अपने सपनों को आकार देते हैं और अपने भविष्य की नींव रखते हैं। लेकिन यह भी सच है कि आज के इस प्रतिस्पर्धी युग में, इसी दौर में आपको सबसे अधिक मानसिक दबाव और तनाव का सामना करना पड़ता है। करियर की चिंता, परीक्षाओं का दबाव और उम्मीदों का बोझ कभी-कभी आपकी इस असीम ऊर्जा को अवरुद्ध कर देता है। आपको यह समझना होगा कि तनाव कोई बाहरी दुश्मन नहीं है, बल्कि यह किसी स्थिति पर हमारी मानसिक प्रतिक्रिया है। जब चुनौतियाँ बड़ी हों और हमें अपनी क्षमता कम लगने लगे, तब तनाव का जन्म होता है।

लेकिन याद रखिए, आपके भीतर की क्षमताएं किसी भी चुनौती से कहीं अधिक बड़ी हैं। सत्र संयोजन में विश्वविद्यालय चिकित्सा केंद्र प्रभारी डॉ. दीपशिखा चौधरी ने कहा कि लगातार तनाव में रहने से हमारी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। इसके विपरीत, हंसने से शरीर में एंटीबॉडीज और इंफेक्शन से लड़ने वाली कोशिकाएं बढ़ती हैं, जिससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर तनाव के शारीरिक दुष्प्रभावों से बचा रहता है। कार्यक्रम का शुभारंभ छात्रावास वार्डन डॉ. महिमा चौरसिया ने मुख्य अतिथि को पुष्प गुच्छ भेंट कर किया, संचालन मधुरिमा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीलम सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रतिभा, साधना पाठक, निर्मला मिश्रा एवं अधिक संख्या में छात्राएं मौजूद रही रहीं।

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