दीपोत्सव- 2026 : पहली बार ‘सोलह शृंगार’ के साथ निकलेगी रामलीला शोभायात्रा

by Next Khabar Team
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-दसवें दीपोत्सव पर साकेत महाविद्यालय से निकलेंगी 21 भव्य झांकियां, 14 में दिखेगी योगी सरकार की उपलब्धियां और सात में रामायण के सातों कांड

अयोध्या । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने और विकास की नई गाथा लिखने का प्रयास दीपोत्सव में भी दिखाई देगा। दसवें दीपोत्सव पर रामनगरी में परंपरा, संस्कृति और विकास का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस बार दीपोत्सव की शोभायात्रा पहली बार रामलीला के ‘सोलह शृंगार’ के साथ निकाली जाएगी। साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली 21 भव्य झांकियों के माध्यम से योगी सरकार की उपलब्धियों और रामायण के सातों कांडों को प्रदर्शित किया जाएगा। सूचना विभाग की ओर से सरकार की उपलब्धियों पर आधारित 14 झांकियां निकाली जाएंगी, जबकि पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां तैयार की जा रही हैं।

साकेत महाविद्यालय परिसर में झांकियों के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। इस बार पहली बार अयोध्या की 16 टीमें रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को शोभायात्रा के रूप में प्रस्तुत करती नजर आएंगी। इनके साथ देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य भी रामपथ की रौनक बढ़ाएंगे। हरियाणा का फाग और केरल का कथककली आयोजन के विशेष आकर्षण होंगे।

विकास और विरासत की झलक दिखाएंगी 21 भव्य झांकियां

दीपोत्सव में योगी सरकार की विकास यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सूचना विभाग 14 आकर्षक झांकियां निकालेगा। इनमें उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्रों में हुए कार्यों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। दूसरी ओर, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग रामायण के सातों कांडों- बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड पर आधारित झांकियां तैयार कर रहा है। इन झांकियों को आकर्षक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने का कार्य एक नामित कंपनी को सौंपा गया है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इन्हें दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली बनाया जा रहा है।

पहली बार अयोध्या की 16 टीमें रामलीला शोभायात्रा में लेंगी हिस्सा

अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि इस बार दीपोत्सव में सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य अयोध्या के रामपथ पर अपनी छटा बिखेरेंगे। दीपोत्सव में 14 प्रदेशों के साथ उत्तर प्रदेश की 11 टीमें लोक संस्कृति के रंग बिखेरेंगी। हरियाणा का फाग, केरल का कथककली, राजस्थान का झूमर, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का संबलपुरी, गाजीपुर का डिबिया नृत्य तथा पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश की लोक कलाएं आयोजन के मुख्य आकर्षण होंगे। लगभग 650 से अधिक कलाकार अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। उन्होंने बताया कि पहली बार अयोध्या की 16 टीमों की रामलीला भी शोभायात्रा के रूप में निकलेगी, जिसमें ‘सोलह शृंगार ’ की परंपरा को विशेष रूप से दर्शाया जाएगा। इससे रामलीला की पारंपरिक प्रस्तुति को शोभायात्रा के माध्यम से एक नया स्वरूप मिलेगा।

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सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को दिखाएंगी सूचना विभाग की झांकियां

जिला सूचना अधिकारी अनुराग रंजन ने बताया कि दीपोत्सव की झांकियों में जल जीवन मिशन, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी), कृषि एवं पशुपालन, आयुष्मान कैशलेस योजना, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था, मिशन शक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, अयोध्या दीपोत्सव, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के माध्यम से कराए गए विकास कार्यों की झलक दिखाई देगी। इन झांकियों के जरिए प्रदेश की प्रगति, समृद्धि और सरकार की विकासपरक योजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।

बुनियादी बदलावों और सांस्कृतिक धरोहर पर रहेगा जोर

सूचना विभाग की झांकियां विशेष रूप से योगी सरकार के कार्यकाल में हुए बुनियादी परिवर्तनों पर केंद्रित रहेंगी। इनमें सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पर्यटन स्थलों के विकास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को प्रमुखता दी जाएगी। वहीं, संस्कृति विभाग की झांकियां रामायण के प्रत्येक कांड की कथा को दृश्य रूप में प्रस्तुत करेंगी, जिससे दर्शक बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की संपूर्ण गाथा को एक क्रम में देख सकेंगे।

आधुनिक तकनीक से तैयार हो रहीं झांकियां

इस बार झांकियों के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि वे रात के समय भी आकर्षक नजर आएं और दीपों की रोशनी में उनकी भव्यता और निखरे। अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति, धार्मिक विरासत और विकास मॉडल को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप इस वर्ष की शोभायात्रा में रामलीला की परंपरा को नई ऊंचाई देने के साथ प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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अयोध्या के दसवें दीपोत्सव में पांच देशों की रामलीला का रंग

अयोध्या । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में रामनगरी का दसवां दीपोत्सव इस बार अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आएगा। दीपोत्सव में पांच देशों के कलाकार अपनी-अपनी परंपराओं और शैली में रामलीला का मंचन कर भगवान श्रीराम की कथा को वैश्विक मंच प्रदान करेंगे। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों के साथ श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। इसके अलावा फिलीपींस, थाईलैंड और रूस के कलाकारों की भागीदारी को लेकर भी तैयारी चल रही है। देश-विदेश के करीब 2500 कलाकार छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल की रामचरित्र एवं रामकथा आधारित प्रस्तुतियां भी दीपोत्सव की सांस्कृतिक विविधता को विस्तार देंगी।

विदेशी रामलीला में दिखेगी अलग-अलग देशों की संस्कृति

दीपोत्सव को केवल दीप प्रज्ज्वलन और धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखकर इसे वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित करने की तैयारी है। विभिन्न देशों की रामलीला शैलियों के माध्यम से दर्शकों को यह देखने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग भाषाओं, वेशभूषाओं और लोक परंपराओं में भगवान श्रीराम की कथा किस तरह प्रस्तुत की जाती है। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों की भागीदारी विशेष आकर्षण होगी। श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप रामलीला का मंचन करेंगे। फिलीपींस, थाईलैंड और रूस के कलाकारों की प्रस्तुतियों को लेकर भी प्रक्रिया चल रही हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अयोध्या में विभिन्न देशों की कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की झलक एक साथ देखने को मिलेगी।

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12 मंचों पर 2500 कलाकारों की प्रस्तुतियां

संस्कृति विभाग की ओर से छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंच तैयार कराए जाने की योजना है। इन मंचों पर लगभग 2500 भारतीय और विदेशी कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। आयोजन में पांच राज्यों की भागीदारी भी रहेगी। असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल के कलाकार श्री रामचरित्र एवं श्रीराम कथा से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इस तरह दीपोत्सव में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक परंपराओं के साथ अंतरराष्ट्रीय रामलीला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि देसी-विदेशी कलाकारों की भागीदारी दीपोत्सव को और आकर्षक बनाएगी। पांच देशों की रामलीला और विभिन्न राज्यों की रामकथा आधारित प्रस्तुतियां आयोजन को सांस्कृतिक विविधता का मंच प्रदान करेंगी। इससे स्थानीय कलाकारों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों से अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि लगभग 2500 कलाकारों की सहभागिता से रामनगरी में विविध संस्कृतियों का जीवंत स्वरूप दिखाई देगा।

धार्मिक के साथ सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र बनी अयोध्या

राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रही है। ऐसे में दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने की यह पहल रामकथा की वैश्विक स्वीकार्यता को सामने लाने का माध्यम बनेगी। विभिन्न देशों की रामलीला के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा और जीवन दर्शन को अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में प्रस्तुत किया जाएगा। दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या को विश्व के सांस्कृतिक मानचित्र पर और व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

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