-सोशल-मीडिया बन गया है आत्मघाती-प्रदर्शन जरिया, बॉडी-काउंट व नशा है घातक-मनोदशा

अयोध्या। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार उत्तर प्रदेश में पिछले 5 सालों में असफल प्रेम संबंधों के कारण आत्महत्या के मामलों में 4 गुना बढ़ोतरी हुई है। 2020 में प्रेम संबंधों के कारण आत्महत्या के 283 मामले सामने आए थे। साल 2024 में प्रेम-प्रसंगों की वजह से 1120 मौतें दर्ज की गईं, जो अब तक का सबसे ज़्यादा सालाना आंकड़ा है। प्रदेश में हर दिन करीब 25 लोग आत्महत्या से जिंदगी खो रहे हैं। 2020 में कुल 4,804 आत्महत्या के मामले 2024 में बढ़कर 9,180 हो गये, जबकि पूरे देश में लगभग पौने दो लाख आत्महत्या प्रति वर्ष हो रही है।
आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण पारिवारिक कलह व प्यार में धोखा है जो कुल आत्महत्याओं का एक-तिहाई हिस्सा है। इतना ही नहीं, बेवफाई या प्रेम विच्छेदन से जुड़े मामलों में आत्महत्या से पहले वीडियो रिकॉर्ड करने का चलन काफी बढ़ चुका है। इस प्रकार वीडियो-क्लिप सुसाइड नोट का रूप ले चुका है। आत्महत्या के कृत्य का भी वीडियो रिकॉर्ड करने या लाइव स्ट्रीमिंग करने का चलन खूब दिख रहा है। प्यार, हवस और आकर्षण में युवा अक्सर फ़र्क समझ नहीं पाते। किशोरों व युवाओं में बढ़ती बॉडी-काउंट स्टेटस यानि फिजिकल -फ्रेंडशिप संख्या तथा नशे का ग्लैमराइजेशन मनोअगवापन की तरफ ले जा रहा है।
सुझाव :
नेशनल सुसाइड प्रिवेंशन स्ट्रेटजी में आत्महत्या को अपराध श्रेणी से हटा कर व्यक्ति के रेस्क्यू,रिलीफ व रिहैबिलिटेशन पर जोर दिया गया। डॉ जॉन ड्रेपर के अनुसार कनेक्ट,कोलैबोरेट व चॉइसफुल रिहैबिलिटेशन सुसाइडल प्रिवेंशन में बहुत ही कारगर है। लाइफ-इंस्टिकंट हार्मोन या जीवेष्णा हार्मोन डोपामिन, ऑक्सीटोसिन , इन्डॉर्फिन व सेराटोनिन चुनौतियों से उबरने का संबल यानि मेन्टल-रेजिलिएन्स प्रदान करता है।
मनोसक्रिय दवाएं व संज्ञान व्यवहार उपचार बचाव व निवारण में बहुत ही प्रभावी है। नवल्स नेशनल अकादमी में आयोजित युवा मनोजागरूकता कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन नें यह जानकारी दी। प्रिंसिपल अपूर्वा चतुर्वेदी के संयोजन में आयोजित सत्र में समस्त शिक्षिकाओं व स्टाफ ने प्रतिभाग किया ।