-दोनों की गिरफ्तारी के लिए 12 मार्च को 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था
अयोध्या। जनवरी माह के अंतिम में जिला कारागार के विशेष सुरक्षा बैरक को तोड़ फरार हुए दोनों विचाराधीन बंदियों के मामले की अब मजिस्ट्रेटी जांच होगी। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट ने सिटी मजिस्ट्रेट को नामित किया है।
28 जनवरी की रात जिला कारागार के विशेष सुरक्षा बैरक के कक्ष संख्या एक में निरुद्ध बलात्कार और गंभीर आपराधिक मामले का आरोपी अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरि पुत्र साधूराम तथा हत्या, गैंगस्टर एक्ट सहित 11 से अधिक गंभीर मामले का आरोपी सुल्तानपुर जनपद निवासी शेर अली पुत्र रफीक अली विशेष सुरक्षा बैरक की ईंट उखाड़ बांस और कंबल की रस्सी के सहारे बाउंड्रीवल पर चढ़कर पोस्टमार्टम हाउस की ओर जंगली इलाके के पेड़ के सहारे फरार हो गए थे।
अगले दिन मामले की जानकारी पर हलचल मच गई थी। प्रकरण में तत्कालीन डिप्टी जेलर ने दोनों के खिलाफ नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी और जेल प्रशासन ने इस गंभीर सुरक्षा चूक के मामले में जेलर और डिप्टी जेलर सहित कई जेल अधिकारियों और कर्मियों को निलंबित कर दिया था।
फरार बंदियों का अभी तक कोई सुराग नहीं हासिल हो पाया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए एसओजी सहित पांच टीम लगाई गई थी। कोई सुराग न मिलने एसएसपी गौरव ग्रोवर ने दोनों की गिरफ्तारी के लिए 12 मार्च को 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
जिला कारागार से फरार दोनों बंदियों के मामले में अब जिला मजिस्ट्रेट ने सिटी मजिस्ट्रेट को जांच का आदेश दिया है। जिसके बाद नगर मजिस्ट्रेट संजीव कुमार उपाध्याय ने आम जन से आठ जून तक घटना के संबंध में मौखिक लिखित साक्ष्य अथवा गवाही मांगी है। कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति की ओर से कोई सूचना अथवा गवाही दी जानी है तो वह आठ जून तक पूर्वान्ह 10 बजे से सायं पांच बजे के मध्य किसी भी कार्य दिवस में नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय में उपस्थित होकर मौखिक/लिखित साक्ष्य अथवा गवाही दे सकता है।
साइबर थाना पुलिस ने पीड़ित के खाते में वापस कराई 1.20 लाख
अयोध्या। एक बैंक उपभोक्ता को झांसे में लेकर ओटीपी पूछ हुई एक लाख 20 हजार रुपए की साइबर ठगी के मामले में साइबर थाना पुलिस ने पीड़ित के बैंक खाते में ठगी गई रकम वापस कराई है। प्रभारी निरीक्षक थाना साइबर क्राइम मो अरशद ने गुरुवार को बताया कि एक पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी।
आरोप लगाया था कि साइबर ठग ने उनको झांसे में लिया और उनसे ओटीपी पूछ लिया। इसी ओटीपी के सहारे उनके बैंक खाते से एक लाख 20 हजार रुपए की रकम अन्य खाते में ट्रांसफर कर ली। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद त्वरित कानूनी कार्यवाही करते हुए ठगी गई रकम को संबंधित बैंक खाते में होल्ड/लीन कराई गई।