राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव

by Next Khabar Team
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-अब संतो की निगरानी में संचालित होगी वैदिक रामानंदी परंपरा, धार्मिक समिति में अयोध्या के प्रमुख संतों को किया गया शामिल

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद आखिरकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब पूजा-अर्चना और सभी धार्मिक गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी संत समाज को सौंपने का निर्णय लिया है। बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया, जिसके बाद मंदिर की धार्मिक व्यवस्था वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप संचालित की जाएगी। ट्रस्ट के निर्णय के अनुसार, धार्मिक मामलों में गठित समिति का फैसला अंतिम और सर्वाेपरि माना जाएगा। नई धार्मिक समिति के अध्यक्ष ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि होंगे।

समिति में अयोध्या के प्रमुख संतों को शामिल किया गया है। जिसमें महंत दिनेंद्र दास (निर्माेही अखाड़ा), महंत कमलनयन दास (मणिराम दास छावनी), महंत डॉ. रामानंद दास (रामकथा कुंज), राजकुमार दास (अधिकारी रामबल्लभा कुंज) और मिथिलेशनंदिनी शरण शामिल हैं। इसके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ भी समिति के सदस्य होंगे। नौ सदस्यीय इस धार्मिक समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा। ट्रस्ट का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य राम मंदिर की सभी धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों का संचालन वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप सुनिश्चित करना है।

ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके संचालन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला की स्थापना करेगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले ट्रस्ट ने एक वर्ष का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया था, जिसमें लगभग 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई थी। अब नई व्यवस्था के तहत नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पाठशाला में अर्चकों को पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन तथा रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले अर्चकों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे देशभर के विभिन्न मंदिरों में अपनी सेवाएं दे सकें। इस पहल से राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था और अधिक व्यवस्थित होगी तथा वैदिक परंपराओं के अनुरूप प्रशिक्षित अर्चकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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