अयोध्या : एक ऐसा गांव जहां भूतों को बना डाला मनरेगा मजदूर

फर्जी जॉब कार्ड से हर माह डकारा गया लाखों, सीडीओ ने गठित की दो सदस्यीय जांच टीम

अयोध्या। तालगॉव के ग्राम प्रधान, ग्राम प्रतिनिधि व ग्राम पंचायत अधिकारी नें सबका साथ सबका विकास की नजीर पेश करते हुए भूतो को भी मनरेगा मजदूर बना विकास कार्य करा लाखो की बन्दरबांट कर डाला है। मृतकों के अलावां तमाम आपात्रो से विकास कार्य कराये गए और फर्जी जॉब कार्ड के सहारे हर महीनें लाखो रूपये डकार लिए गए। यही नही इंदिरा आवास आवंटन के नाम पर अनुचित धन लिया गया है। घपले की शिकायत के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने दो सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया है जांच के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी व सहायक अभियंता बाढ़ खण्ड द्वितीय का दायित्व सौंपा गया है।
विकास खण्ड रूदौली अन्तर्गत तालगॉव में फर्जी विकास कार्यो की शिकायत ग्रामवासी सुधीर कुमार पाण्डेय द्वारा जिलाधिकारी से किया गया जिस पर जिलाधिकारी द्वारा जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्रावली गठित कर प्रस्तुत करने के आदेश दिए है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी अयोध्या तथा सहायक अभियंता द्वितीय बाढ़ खण्ड अयोध्या को नामित कर जॉच अधिकारी नियुक्त किया है। यही नही गॉव के हरिओम प्रकाश उपाध्याय, अमर चन्द, माधव कनौजिया, कौशल किशोर, सत्यनाम, विनोद कुमार तिवारी और सुधीर कुमार पाण्डेय ने नोटरी शपथ पत्र भी शिकायती पत्र में संलग्न किया है जिसमें तालगॉव के फर्जी विकास कार्यो और लाखों रूपयों को डकार जाने का जिक्र है।
कन्सालीडेशन रिर्पोट आफ पेमेन्ट वर्कर वर्ष 2016-17 में दर्ज है कि 22 मजदूरो से मनरेगा के तहत मार्ग पटाई, तालाब जीर्णोधार,नाला खुदाई, इंदिरा आवास निर्माण, जय हाउस निर्माण आदि कार्य कराकर रू 84042.00 का भुगतान कर दिया गया।गौरतलब तो यह है कि जिनका सूची में नाम दर्ज है उनकी मृत्यु निर्माण कार्य अवधि के बहुत पहले ही हो चुकी है।
अभिलेखो में दर्ज मनरेगा मजदूर श्रीमती पत्नी राम लाल, श्यामा देवी पत्नी बैजनाथ, यशोदा पत्नी राम दीन,धनपता पत्नी खुशीराम, चतुरा पत्नी राम दीन, सावित्री पत्नी ओहरवादीन, कलावती पत्नी दाता राम, कुसुम पत्नी राम फेर कोरी, राम किशोरी पत्नी गया प्रसाद और राजदेई की मृत्यु 2016 के पूर्व हो चुकी थी तो सत्र 2016-17 में ग्राम प्रधान, प्रधान प्रतिनिधि व ग्राम पंचायत अधिकारी ने मनरेगा विकास कार्य इनके भूतो से करा अजूबा कर दिखाया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्राम पंचायत तालगॉव का प्रधान तुलसीराम, प्रधान प्रतिनिधि अरूण कुमार उर्फ दीपक तिवारी और सत्र 2016-17 के तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी ने सैकड़ो लोग जो दूर दराज शहरो में नौकरी व रोजगार करते है उनका मनरेगा के तहत फर्जी जॉब कार्ड बना लाखों रूपये निकाल लिया है। यही नही इन लोगो ने शौचालय निर्माण में बेस लाइन सर्वे 2012 को अपने भ्रष्टाचार का आधार बनाकर सूची का झांसा देकर ग्रामीणो से अनुचित धन की वसूली कर ली है। चूकि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जो भवन निर्माण सामाग्री की दुकान तिवारी ट्रेडर्स के नाम से खोल रखा है जिससे निर्माण सामग्री की सप्लाई देकर अपने मजदूरो से शौचालय निर्माण करवाया है।
जिला अधिकारी को अवगत कराया गया कि राम विलास तिवारी जो एक साल से अधिक समय तक जेल में थे उनको जेल में बन्द होने के बावजूद राशन और मिट्टी का तेल दिया गया। पाण्डेय का तालाब का फर्जी जीर्णोधार दिखलाकर तीन लाख रूपये का भुगतान मनरेगा के तहत कर लिया गया। जिस अवधि में यह घपला किया गया उस समय तालाब में 10 फिट पानी था और गॉव के माधव कनौजिया के पुत्र राजन की मृत्यु तालाब में डुबने से हुई थी। लाखों रूपये का आहरण तालाब में पानी भरवाने के नाम पर किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि तालाब के पास उसका ट्यूबवेल है और उसमें अपनी ट्यूबवेल से तालाब में पशु पक्षियों के पीने के लिए पानी तो भरा किन्तु पानी भरने के नाम पर कोई भुगतान नही लिया है। नाली, खंड़ंजा आदि विकास कार्य भी फर्जी कराकर 25 से 40 लाख रूपये का भुगतान लिया गया है।
डी0 एम0 को अवगत कराया गया है कि इंदिरा आवास के नाम पर भी आवास चयन के नाम पर प्रति आवास करीब 20 हजार रूपया लोगो से वसूला गया। आवास निर्माण में देरी के कारण पात्रो में व्यापक असंतोष है। ग्रामीण विनोद कुमार तिवारी ने घपलो की शिकायत मण्डलायुक्त महोदय से की जिस पर डी आर डी ए के नियुक्त जॉच अधिकारी सहायक अभियंता एस के त्रिपाठी ने शिकायतकर्ता को विकास भवन बुलाया और सभी कागजात ले लिया और जॉच ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया। डीएम से शिकायतकर्ता ने मॉग किया है कि ग्राम पंचायत तालगॉव में हुए विकास मद की धनराशि निकासी पर तत्काल रोक लगाई जाय तथा किसी उच्च अधिकारी से जॉच करवाकर ग्राम प्रधान, प्रधान प्रतिनिधि और ग्राम पंचायत अधिकारी के विरूद्ध विधिक दण्डात्मक कार्यवाही कर सभी दोषियो को जेल भेजा जाय साथ ही फर्जी तरीके से आहरित धनराशि की रिकवरी दोषी घपलेबाजो से की जाय।

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