नैक के मानकों के अनुरूप अपनानी होगी शिक्षण तकनीक : प्रो. मनोज दीक्षित

राष्ट्रीय मूल्यांकन व प्रत्यायन परिषद् (नैक) द्वारा जागरूकता कार्यशाला का हुआ आयोजन

अवध विवि में आयोजित नैक जागरूकता कार्यशाला में शामिल विवि व महाविद्‍याय के शिक्षक

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में एक दिवसीय राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (नैक) द्वारा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में प्रो0 विष्णुकांत एस0 चटपल्ली सलाहकार नैक बैंगलोर एवं डॉ0 प्रतिभा सिंह उप सलाहकार नैक दिल्ली रही। कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। भूमण्डलीकरण के इस युग में अब शिक्षण संस्थानों को अपनी गुणवत्ता सिद्ध करने के लिए कुछ निश्चित मानकों को अपनाना ही होगा। इसी के क्रम भारत में शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता एवं मानकों के लिए नैक का गठन किया गया है। प्रो0 दीक्षित ने बताया कि नैक यू0जी0सी0 की एक स्वायत्तशासी संस्था है। अब इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों को नैक के मानकों के अनुरूप शिक्षण तकनीक अपनानी होगी। अभी तक शिक्षण संस्थानों की सफलता छात्रों की संख्या पर तय होती रही है परन्तु अब नैक ने शिक्षण संस्थानों मानको में काफी कुछ परिवर्तन कर दिया है। प्रो0 दीक्षित ने बताया कि मानकों की पारदर्शिता पूरी तरह से स्पष्ट है और शिक्षण प्रशिक्षण के साथ-साथ संस्थानों को शोध कार्य, नेट की उपलब्धता अपग्रेडेड लाइब्रेरी, अवार्ड, इंन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख विषयों को प्राथमिकता देनी होगी।

गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए अपनाना होगा नैक

अवध विवि में आयोजित नैक जागरूकता कार्यशाला में विचार व्यक्त करते प्रो0 विष्णुकांत एस0 चटपल्ली

तकनीकी सत्र प्रथम को संबोधित करते विशेषज्ञ के रूप में प्रो0 विष्णुकांत एस0 चटपल्ली ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों को प्रत्येक क्षेत्र में अपनी गुणवत्ता को सिद्ध करना होगा। नैक का प्रथम उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में उन सभी विन्दुओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जिससे विश्वविद्यालय विश्वस्तरीय शिक्षा प्रतियोगिता का मुकाबला कर सके। प्रो0 विष्णुकांत ने बताया कि शिक्षा ऐसी सुसंगत होनी चाहिए जो सभी वहन कर सके और शिक्षण संस्थानों के एक निश्चित मानदंड होने चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षण संस्थान एवं नगरीय क्षेत्रों के संस्थान के मानकों में एक समानता आवश्यक है। जिन संस्थानों ने अभी तक नैक प्रक्रिया को नही अपनाया है। उन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए नैक को अपनाना होगा। इसके लिए एक निश्चित मानकों के तहत सभी संस्थानों को एक 121 अंकों के तहत आई0सी0टी0 आधारित डाटा तैयार करना होगा।

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नैक आवेदन के लिए सभी प्रक्रियायें ऑनलाइन उपलब्ध

नैक जागरूकता कार्यशाला में डॉ प्रतिभा सिंह को स्मृति चिन्ह देते कुलपति प्रो मनोज दीक्षित

द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ0 प्रतिभा सिंह ने बताया कि नैक का उद्देश्य सभी राज्यों में शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए जागरूकता प्रदान करना है। यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि देश के राज्यों में सबसे अधिक शिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश में है परन्तु नैक से मूल्यांकित शिक्षण संस्थान सबसे कम इसी प्रदेश में है। डॉ0 प्रतिभा ने स्पष्ट किया कि हमारा उद्देश्य एक निश्चित मानकों के अधीन शिक्षण संस्थानों को उच्चीकृत कर गुणवत्तापरक शिक्षण व्यवस्था प्रदान करने का है इसी के लिए नैक के क्वालिटी इंडीकेटर फ्रेम वर्क के तहत सभी शिक्षण संस्थानों को जोड़ना है। नैक आवेदन के लिए सभी प्रक्रियायें ऑनलाइन उपलब्ध है और उसी के पोर्टल पर वांछित सूचनाओं की जानकारी शिक्षण संस्थान प्राप्त कर सकते है। नैक मूल्यांकन के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षण संस्थान अपने सभी रिकार्ड डिजिटली तैयार करने होंगे। आई0टी0वी0 प्रबन्धन के तहत कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश एवं मानकों को शिक्षण संस्थानों को अपनाना होगा और एक निश्चित समयावधि में वांछित सूचनाएं अपलोड करनी होगी।
कार्यशाला को शुभारम्भ मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम भेटकर किया गया। तकनीकी सत्र के समापन पर विश्वविद्यालय परिसर एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों के उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा विशेषज्ञों से चर्चा एवं परिचर्चा की गयी। विश्वविद्यालय नैक समन्वयक प्रो0 फारूख जमाल ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संचालन किया। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय नैक की सदस्य प्रो0 नीलम पाठक द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रो0 एस0एन0 शुक्ल, कार्यपरिषद सदस्य ओम प्रकाश सिंह, मुख्य नियंता प्रो0 आर0 एन0 राय, प्रो0 के0 के0 वर्मा, प्रो0 आशुतोष सिन्हा, प्रो0 राजीव गौड़, प्रो0 एस0के0 रायजादा, डॉ0 आर0के0 सिंह, प्रो0 रमापति मिश्र, डॉ0 नीलम यादव, डॉ0 तुहिना वर्मा, डॉ0 गीतिका श्रीवास्तव, डॉ0 शशि सिंह, डॉ0 नीलम सिंह, डॉ0 नरेश चौधरी, डॉ0 अनिल कुमार, डॉ0 शैलेन्द्र कुमार, डॉ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी, डॉ0 आर0एन0 पाण्डेय, डॉ0 प्रिया कुमारी, डॉ0 श्रीश अस्थाना, डॉ0 विनय मिश्र, डॉ0 शोभनाथ यादव, डॉ0 मनोज छापड़िया, डॉ0 कपिलदेव, डॉ0 बृजेश भारद्धाज सहित सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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