आधुनिक तकनीक से समृद्ध किसान : गन्ना खेती के कायाकल्प की ओर इंडियन पोटाश लिमिटेड

by Next Khabar Team
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-एस. वी. वर्मा, प्रबंध निदेशक, इंडियन पोटाश लिमिटेड के नेतृत्व में गन्ना खेती के आधुनिकीकरण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम

ब्यूरो। भारतीय कृषि आज श्रमिकों की कमी, बढ़ती लागत और समय पर फसल कटाई जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। विशेष रूप से गन्ना उत्पादन में कटाई के लिए पर्याप्त श्रमिकों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में यंत्रीकृत गन्ना कटाई किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), श्री एस. वी. वर्मा, प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में, गन्ना कटाई के आधुनिकीकरण और किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए यंत्रीकृत कटाई को प्रोत्साहित कर रहा है। कंपनी का उद्देश्य आधुनिक तकनीक को किसानों तक पहुंचाकर खेती को अधिक किफायती, समयबद्ध और टिकाऊ बनाना है।

आधुनिक मशीनें, बेहतर उत्पादकता

पारंपरिक तरीके से गन्ने की कटाई में अधिक श्रम, समय और लागत लगती है। इसके विपरीत, आधुनिक स्वचालित हार्वेस्टर एक घंटे में लगभग 10–12 टन गन्ने की कटाई कर सकते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में आठ घंटे में 80–100 टन तक गन्ने की कटाई संभव है।

ये मशीनें गन्ने की कटाई, पत्तियों को अलग करने, गन्ने को छोटे टुकड़ों में काटने और ट्रेलर में भरने जैसे कार्य एक साथ करती हैं। इससे कटाई की गति बढ़ती है और श्रमिकों पर निर्भरता कम होती है। हालांकि, मशीन का चयन खेत के आकार, मिट्टी, फसल की स्थिति और उपलब्ध परिवहन सुविधाओं के अनुसार करना आवश्यक है।

किसानों की लागत में कमी और आय में वृद्धि की संभावना

यंत्रीकृत कटाई केवल समय की बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने की भी संभावनाएं हैं।

वैज्ञानिक अवशेष प्रबंधन और बेहतर खेत प्रबंधन के माध्यम से प्रति हेक्टेयर लगभग ₹3,000–4,000 की बचत स्टबल प्रबंधन, ₹2,000 तक फफूंदनाशक संबंधी खर्च और ₹6,000–8,000 तक खरपतवार नियंत्रण पर संभावित रूप से की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त, गन्ने की बेहतर कटाई और अवशेषों के उचित प्रबंधन से अगली पेड़ी (रैटून) की पैदावार में अनुकूल परिस्थितियों में 10–15 प्रतिशत तक सुधार की संभावना हो सकती है। वास्तविक लाभ स्थानीय परिस्थितियों और वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन पर निर्भर करेंगे।

फसल अवशेष: समस्या नहीं, खेत की संपत्ति

गन्ने की कटाई के बाद खेत में बड़ी मात्रा में हरी पत्तियां, सूखी पत्तियां और अन्य जैविक अवशेष बचते हैं। इनका अनुमानित उत्पादन प्रति हेक्टेयर 10–15 टन तक हो सकता है।

अक्सर किसान इन अवशेषों को जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत, इन अवशेषों का मल्चिंग और जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार कम करने, मिट्टी की संरचना सुधारने और जैविक पदार्थ बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

इस प्रकार यंत्रीकृत कटाई के साथ वैज्ञानिक अवशेष प्रबंधन अपनाकर किसान पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता, दोनों को मजबूत कर सकते हैं।

पेड़ी फसल का संरक्षण भी जरूरी

गन्ने की खेती में पेड़ी फसल किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए मशीनों से कटाई करते समय गन्ने के ठूंठ और कलिकाओं को नुकसान से बचाना आवश्यक है। उचित कटाई ऊंचाई, संतुलित मशीन संचालन, मिट्टी में नमी का ध्यान और समय पर खाद एवं सिंचाई प्रबंधन से पेड़ी फसल की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिलती है।

IPL का व्यापक अभियान: पांच वर्षों में 50 प्रतिशत क्षेत्र यंत्रीकृत करने का लक्ष्य

इंडियन पोटाश लिमिटेड की देश के चार राज्यों—उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और ओडिशा में कुल 13 चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में 6, गुजरात में 3, बिहार में 2 और ओडिशा में 2 मिलें शामिल हैं।

श्री एस. वी. वर्मा, प्रबंध निदेशक, IPL की दूरदर्शी सोच के अनुरूप कंपनी ने अपनी चीनी मिलों के माध्यम से स्वचालित गन्ना हार्वेस्टर किसानों तक पहुंचाने की पहल शुरू की है।

उनका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत गन्ना क्षेत्र को यंत्रीकृत कटाई के दायरे में लाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधुनिक मशीनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित ऑपरेटर, किसानों को तकनीकी जानकारी और खेत से चीनी मिल तक बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इस अभियान में IPL के मुख्य कृषि वैज्ञानिक डॉ. यू. के. तियोतिया को तकनीकी मार्गदर्शन और ज्ञान-विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके मार्गदर्शन में खेतों पर प्रदर्शन, किसानों के साथ तकनीकी संवाद और कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से यंत्रीकृत कटाई के लाभों से किसानों को परिचित कराया जा रहा है।

छोटे किसानों के लिए भी आधुनिक तकनीक की सुविधा

महंगी हार्वेस्टिंग मशीनों को खरीदना छोटे और सीमांत किसानों के लिए कठिन हो सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए कस्टम हायरिंग व्यवस्था, किसान समूहों, सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से मशीनों को किराये पर उपलब्ध कराना एक प्रभावी विकल्प है।

इससे किसान बिना भारी पूंजी निवेश किए आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकते हैं। साथ ही मशीनों का बेहतर उपयोग, समय पर कटाई और परिवहन व्यवस्था में भी सुधार संभव है।

आधुनिक कृषि की ओर एक मजबूत कदम

यंत्रीकृत गन्ना कटाई केवल मशीनों के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय गन्ना खेती को अधिक आधुनिक, वैज्ञानिक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।

श्री एस. वी. वर्मा के नेतृत्व में इंडियन पोटाश लिमिटेड का यह प्रयास किसान कल्याण, कृषि उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ता है। उचित तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और चीनी मिलों के समन्वय से यह पहल गन्ना किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकती है।

IPL का संकल्प स्पष्ट है, आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना, खेती की लागत कम करने में सहयोग देना और भारतीय गन्ना उद्योग को अधिक टिकाऊ एवं समृद्ध बनाना।

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