-संतो ने एसआईटी रिपोर्ट मानने से किया इन्कार, रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जजों की समिति से जांच की मांग

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावे के कथित विवाद को लेकर संत समाज की बैठक में मंगलवार को उस समय हंगामा हो गया, जब बैठक स्थल पर पुलिस और इंटेलिजेंस के जवान पहुंच गए। संतों ने आरोप लगाया कि उन्हें राम मंदिर चढ़ावे के कथित विवाद पर बैठक और चर्चा करने से रोका गया। वहीं श्रीराम श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित चंदा प्रकरण और एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर संतों का असंतोष सामने आया।
चंपत राय के विरोध में संतों की ओर से रामायणम आश्रम में प्रस्तावित बैठक आयोजित की जानी थी। संतों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने बैठक नहीं होने दी और आश्रम में ताला लगा दिया। कुछ देर तक संतों को नजरबंद किए जाने का आरोप भी लगाया गया। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि किसी को बैठक करने से मना नहीं किया गया। पुलिस का काम सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।बैठक स्थल पर नया घाट चौकी प्रभारी और कोतवाली प्रभारी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। संतों ने जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए चंदा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान संतों ने ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे भी लगाए।
एसआईटी रिपोर्ट मानने से किया इन्कार
प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा ने कहा कि भगवान श्रीराम के मंदिर में चंदा चोरी हुई है। आरोप लगाया कि छोटी मछलियों को फंसाकर बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संत एसआईटी की रिपोर्ट को नहीं मानते। मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए और चंदा प्रकरण में शामिल प्रमुख लोगों को अयोध्या से बाहर किया जाए।उन्होंने कहा कि संत श्रीराम मंदिर का दर्शन करेंगे और वहां जाकर भगवान श्रीराम से माफी मांगेंगे।
रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जजों की समिति से जांच की मांग
अयोध्या। जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण महाराज ने कहा कि संत मौजूदा जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए। उनके अनुसार ऐसी जांच से ही निष्पक्षता पर विश्वास कायम हो सकेगा।
निष्पक्ष जांच तक जारी रहेगा आंदोलन
महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने कहा कि चंदा प्रकरण में जिम्मेदार लोगों को अयोध्या से बाहर जाना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, संत पूरे प्रदेश में जनजागरण करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच नहीं होती, संत संतुष्ट नहीं होंगे।उन्होंने कहा कि भले ही मंगलवार को उनकी बैठक नहीं हो सकी, लेकिन आने वाले समय में इससे भी बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। संतों की ओर से पूरे प्रदेश में आंदोलन को विस्तार देने की चेतावनी दी गई।
‘पूरे अयोध्या पर कब्जे की योजना’
श्री रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष दिलीप दास त्यागी जी महाराज ने कहा कि राम मंदिर का फैसला आया था और मंदिर का निर्माण होना चाहिए था, लेकिन अब पूरे अयोध्या पर कब्जे की योजना चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना मुआवजा दिए चारों तरफ सरकार कब्जा कर रही है।उन्होंने कहा कि सरकार की ही समिति जांच कर रही है और वही निर्णय भी दे रही है। ऐसे में संत इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
एक लाख संतों के साथ बड़ी बैठक की चेतावनी
संतों ने आरोप लगाया कि चंदा प्रकरण में आरोपितों को बचाया जा रहा है और जिला प्रशासन की इसमें मिलीभगत है। विरोधी संत गुट ने चेतावनी दी कि जल्द ही एक लाख संतों को लेकर अयोध्या में बड़ी बैठक की जाएगी।संतों ने वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर संतों की सहभागिता वाला नया ट्रस्ट गठित करने की मांग भी उठाई।
दर्जनभर से कम संत रहे मौजूद
रामायणम आश्रम में प्रस्तावित बैठक में महंत जन्मेजय शरण, प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा और महामंडलेश्वर परमानंद गिरि, दिलीप दाससमेत दर्जन भर से कम संत मौजूद रहे। हालांकि पूरी बैठक में मुश्किल से करीब दर्जनभर संत ही उपस्थित रहे। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शरद शुक्ला भी मौजूद रहे।बैठक स्थल पर नया घाट चौकी प्रभारी और कोतवाली प्रभारी पुलिस दलबल के साथ मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने मौके की स्थिति पर नजर बनाए रखी।
पुलिस ने कहा- बैठक से किसी को नहीं रोका
संतों द्वारा बैठक रोकने, आश्रम में ताला लगाने और कुछ देर तक नजरबंद किए जाने के आरोपों पर पुलिस का कहना है कि किसी को बैठक करने से मना नहीं किया गया। पुलिस के अनुसार उसका काम सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल मौके पर मौजूद था।बैठक के बाद संतों ने कहा कि चंदा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा। आने वाले दिनों में बड़ी बैठक और आंदोलन की चेतावनी के बाद अयोध्या में संतों की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है।