अनशनकारी संत को प्रशासनिक अमले ने जबरन उठाया

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भडकी हिन्दू महासभा, कहा संत को जबरन हटाया जाना लोकतन्त्र की हत्या

अयोध्या । धर्मनगरी अयोध्या के तपस्वी आश्रम में श्रीराम मन्दिर निर्माण की मांग को लेकर अनवरत धरना दे रहे संत परमहंसदास को बीती अर्धरात्रि को प्राशासनिक अमले ने जबरन उठाकर वाहन में लाद लिया और उन्हें लेकर राजधानी लखनऊ चले गये। पुलिस अभिरक्षा में अनशन दे रहे संत परमहंस दास को पीजीआई में भर्ती कराया गया है।
इस मुद्दे को लेकर हिन्दू महासभा ने आक्रेश जताया है। महासभा का कहना है कि अयोध्या संतो का ऐसा अपमान करने की उम्मीद भाजपा से तो कदापि नही थीं ।वह भी ऐसे समय मे जब प्रदेश का मुख्यमंत्री खुद संत हो ,यह घटना स्तब्धकारी है दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक है लोकतन्त्र की. हत्या है।
उक्त बातें महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पान्डेय ने कहीं श्री पान्डेय ने कहा कि जो मांग संत परमहंसदास जी ने उठा रहे थे वही मांग करोंडो रामभक्तो की है इसमे गलत क्या था, जब मोदी वोट व नोट के लिए मस्जिद -मस्जिद जा सकते है तो फिर जिस राम के नाम पर उन्हे यह सत्ता मिली उसकी उपेक्षा भला क्यो? श्री पान्डेय ने कहा कि सोमवार को हिन्दू महासभा की ओर से संत का समर्थन करने हेतु वे अयोध्या पहुंच चुके थे परन्तु किन्तु जब मीडिया मित्रो ने यह अनर्थकारी सूचना दी तब से वे स्तब्ध व आहत है राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री पान्डेय ने सरकार से यह मांग की है कि संवैधानिक तरीके से करने वाले संत परमहंसदास जी महाराज को तत्काल छोडा जाऐं और मोदी खुद आकर इस जघन्य कृत्य की संतो से क्षमा मांग कर राम मंदिर के दर्शन करे नही तो वह दिन दूर नही जब जिन श्री राम ने उन्हे सत्ता पर बैठाया वही प्रभु श्री राम उन्हे सत्ता से बाहर भी कर देंगे फिर भाजपा को ना मोदी बचा पाऐंगे ना ही योगी श्री पान्डेय के साथ मे प्रदेश उपाध्यक्ष महंत रामलोचन शरण शास्त्री, अरविन्द शास्त्री कुलदीप श्रीवास्तव चन्द्रहास दीक्षित महंत ओमप्रकाश दास भी मौजूद रहे।

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