फिज़िकल फ्रेंडशिप का दौर, बन रहा टीनेज प्रेग्नेंसी का ठौर : डा. आलोक मनदर्शन

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40 फीसदी से ज्यादा किशोर हैं सेक्सुअली एक्टिव 

फैजाबाद। फेलो फ्रेंडशिप के फिजिकल फ़्रेंडशिप में बदलने के कारण पश्चिमी देशों की किशोर सामाजिक स्वास्थ्य समस्या अब भारत मे भयावक रूप लेती जा रही है। नेशनल सैम्पल सर्वे की ताजा रिपोर्ट  के अनुसार  जागरूकता के अभाव में किशोरियों में गर्भपात कराने का चलन काफी बढ़ चुका है जिससे कि गर्भपात जनित किशोरी मृत्युदर बढ़कर 7 प्रतिशत तक हो चुकी हैं।
        टीनएज प्रेग्नेन्सी जहां अभी तक विकसित देशों की एक बड़ी सामाजिक व स्वास्थ्य समस्या रही है वहीं इसका प्रकेाप भारत जैसे विकासशील देष में भी तेजी से बढ़ चुका है।हाल यह है कि 20 साल से कम उम्र की लड़कियों में लगभग प्रत्येक पांचवीं किशोर प्रेग्नेन्सी का अन्त गर्भपात के रूप में हो रहा है। चैंकाने वाली बात यह है कि 20 साल से कम उम्र की शहरी युवतियों में गर्भपात का रूझान राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी अधिक है। शहरी किशोरियों में गर्भपात का प्रतिशत 14 हैं तथा ग्रामीण क्षेत्र में 8 प्रतिशत हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 40 प्रतिशत भारतीय किशोर-किशोरी सेक्सुवली एक्टिव हैं तथा 10 प्रतिशत से भी कम सुरक्षित गर्भरोधी उपायों का इस्तेमाल करते हैं। यह बात गुरुनानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित एनएसएस मनो जागरुकता ट्रेनिग में भारत सरकार सिफ्सा के प्रमुख प्रशिक्षक व मनो परामर्शदाता डॉ़ आलोक मनदर्शन ने कही ।

दुष्प्रभाव :

डा0 आलोक मनदर्शन के अनुसार किशोर मित्र क्लीनिक में सेक्सुवली एक्टिव किशोर-किशोरियों की आमद करीब 15 प्रतिशत है जबकि इसका बहुत बड़ा हिस्सा सामाजिक संकोच व गोपनीयता भंग होने के डर से परामर्श के लिए नहीं आ पाते हैं जिसका दुःष्परिणाम उनके शारीरिक व मानसिक स्तर पर इस प्रकार पड़ता है कि कैरियर बनाने की इस उम्र में वे अवसाद व हीनभावना से ग्रसित होकर न केवल जीवन को कुंठित कर बैठते है, बल्कि खतरनाक आत्मघाती प्रयास तक  कर बैठते है या फिर गोपनीय गर्भपात के चक्कर में उल्टी सीधी सलाह अपनाकर अपने स्वास्थ्य को गंभीर हानि तक पहुँचा  बैठते हैं।

बचाव :

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार टीनएज प्रेग्नेन्सी के दुष्परिणामों से निपटने के लिए सेफ सेक्स प्रैक्टिस की जागरूकता व गर्भरोधी साधन जैसे इमरजेंसी कान्ट्रासेप्टिव पिल्स, कंडोम्स व ओरल कान्ट्रासेप्टिव पिल्स की सुलभता पर जोर दिया गया है।साथ ही गर्ल फ्रेंड या बॉय फ्रेंड के बढ़ते शरीरिक सम्बन्धो के दायरे को एक स्वस्थ व मर्यदित भारतीय संस्कृति के दायरे में पुनः स्थापित किया जाय जिसके लिए परिवार व समाज को किशोर किशोरियों में तेज़ी से पनप रही विकृत मनोवृत्तियिओं को हत्त्साहित किया जाय तथा टीनेज पर्सनालिटी डेवलपमेन्ट पर मनोपरामर्श अवश्य लिया जाय
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