कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन को पता नहीं और हो गया अवैध कटान

by Next Khabar Team
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-अवैध रूप से काटी गई लकड़ी विश्वविद्यालय के मछली उत्पादन तालाब के पास की गई डंप

मिल्कीपुर । आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज परिसर में अवैध रूप से काटे गए हरे भरे विशालकाय आम के पेड़ की लकड़ी को बिना विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के विश्वविद्यालय परिसर से बाहर किए जाने की जुगत में शामिल विश्वविद्यालय कर्मियों को कामयाबी न मिलने के बाद अब अवैध कटान को लेकर विश्वविद्यालय में 3 दिन से खिचड़ी पक रही है। हालांकि विश्वविद्यालय के जिम्मेदार संपत्ति अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को इस अवैध कटान की भनक तक नहीं है।

मामला अब धीरे-धीरे विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद अब धीरे-धीरे गरमाता जा रहा है। बताते चलें कि किसी विश्वविद्यालय परिसर से हरा भरा विशालकाय आम का पेड़ बिना किसी अनुमति अथवा विधिक प्रक्रिया को पूर्ण किए काट डाला गया था। बीते सोमवार को उक्त लकड़ी को किसी वाहन पर लोड कर विश्वविद्यालय परिसर से बाहर किया जा रहा था। चर्चा है कि विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ शम्भू प्रसाद ने लकड़ी लेते बहन को रोक लिया और पूछ ताछ शुरू की तो मामला कुछ और निकला। फिर क्या था इस गोरख धंधे में शामिल विश्वविद्यालय कर्मियों ने उक्त लकड़ी को हटा कर विश्वविद्यालय परिसर स्थित मछली उत्पादन तालाब संख्या एक से पांच के बगल डंप कर दिया। घटनाक्रम के बारे में जब विश्वविद्यालय के संपर्क अधिकारी डॉक्टर सीताराम मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में ही नहीं है।

वहीं दूसरी ओर लकड़ी पकड़े जाने को लेकर चर्चाओं में आए डॉ शंभू प्रसाद ने बताया कि मेरे द्वारा मामले की जांच की जा रही है। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी के माध्यम से पूरी जानकारी मीडिया को दी जाएगी। जबकि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ सुशांत श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसा कोई मामला विश्वविद्यालय के किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा आज तक संज्ञान में ही नहीं लाया गया। उन्होंने बताया कि परिस्थिति जन्य साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए मामले में जांच कमेटी गठित की जाएगी और अब तक जिनका भी नाम प्रकाश में आया है।

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उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी की जाएगी साथ ही जो भी दोषी मिलेंगे उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही भी अमल में लाई जाएगी। वही विश्वविद्यालय सूत्रों की माने तो समूचे प्रकरण में जीपीवी फॉर्म के प्रभारी एवं विश्वविद्यालय के प्रभारी सुरक्षा अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मिली है। इस प्रकार से विश्वविद्यालय के संपत्ति अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को घटना की जानकारी ही नहीं है और विश्वविद्यालय के कई जिम्मेदार कर्मी अंदर-अंदर खिचड़ी जरूर पका रहे हैं।

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