-पी आई एल पर हुई सुनवाई, संबंधित याचिकाओं के साथ मामला जोड़ा गया; 2 नवंबर को अगली सुनवाई
अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी , रामधन गबन, मंदिर निर्माण में घोर कमीशन बाजी, भूमि खरीद में घोटाला,और कथित वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरण को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय डिपोनेंट( अभिसाक्षी ) की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। ‘
न्यायालय ने मामले को इसी विषय से संबंधित अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। इस अवसर पर अयोध्या टेढ़ी बाजार स्थित अरुंधति रेस्टोरेंट में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय द्वारा एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा गया कि
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की डबल बेंच पीठ के समक्ष हुई। हिंदू महासभा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका की पैरवी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड वारिंदर कुमार शर्मा कर रहे हैं, जबकि मनीष पांडेय याचिका में अभिसाक्षी हैं।
ट्रस्ट के पदाधिकारी अपने दायित्व का निर्माण नहीं कर पाए इसलिए वे दंड के भागी होनी चाहिए-मनीष पान्डेय
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय के अनुसार, याचिका में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रमुख रूप से तीन महत्वपूर्ण प्रार्थनाएं रखी गई हैं। इनमें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संबंध में न्यायालय से ट्रस्ट को भंग किए जाने, मंदिर से संबंधित चढ़ावे एवं धनराशि के लेन-देन की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की समिति से कराए जाने, तथा जांच में यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त याचिका में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोविंद गिरी एवं गोपाल राव सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की मांग भी उठाई गई है।
चंपत राय द्वारा अवैध ढंग से खरीदी गई जमीनों, मंदिर पर कब्जे एवं मंदिर की संपत्ति को गायब किए जाने जैसी , बातों को याचिका में प्रमुख रूप से उठाया गया है,श्री पांडेय ने अभी कहा कि उन्हें प्रारंभ से ही एस आई टी की जांच पर भरोसा नहीं था, क्योंकि एस आई टी सरकारी तोता है वह सरकार की सुनेगा और सरकार की ही बोलेगा, जिस तरह पूर्व लेखा अधिकारी महिपाल सिंह, बार एसोसिएशन जनपद अयोध्या की बातों को गंभीरता से ना लेना यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि सरकार छोटी मछलियों को फंसा कर बड़े मगरमच्छों को बचाना चाहती है,
श्री पांडेय ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि बैंक कर्मियों को क्यों क्लीन चिट दी गई ?मुख्य सुरक्षा अधिकारी अर्जुन देव का ट्रांसफर क्यों कर दिया गया?, और बड़े घोटाले के आरोपी पूर्व सीएमडी एनबीसीसी अनूप कुमार मित्तल जिनके विरुद्ध 2150 करोड़ का घोटाला दर्ज है जिनके विरुद्ध सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था वह राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के सदस्य क्यों हैं? मनीष पांडेय ने कहा कि “श्रीराम जन्मभूमि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर से जुड़े चढ़ावे और धनराशि के प्रत्येक लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए थी ,जो कि नहीं हुई ट्रस्ट के सदस्य अपने दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर पाए,हमारा उद्देश्य वास्तविक चोरों/ दोषियों को दंड दिलवाने के सथ-साथ, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और सत्य को सामने लाना है।
”उन्होंने कहा कि हिंदू महासभा को न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और 2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से पूर्व कारसेवक रवि शंकर पांडेय, रमेश यादव, राहुल यादव, इत्यादि प्रमुख रूप से लोग मौजूद रहे।