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वैज्ञानिकों व चिकित्सकों को नई तकनीक से लैस होने की जरूरत

कृषि एवं पशुपालन की चुनौतियों को लेकर दो दिवसीय सेमिनार का हुआ शुभारम्भ

मिल्कीपुर। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन मेरठ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया।
अपने उद्बोधन में प्रोफेसर गया प्रसाद कुलपति सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ ने कृषि एवं पशुपालन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत की बढ़ती आबादी एवं जलवायु परिवर्तन पर विस्तृत रूप से कृषि वैज्ञानिकों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों को नई तकनीकों से लैस होने का सुझाव दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. यू. एस गौतम कुलपति कृषि विश्वविद्यालय बांदा एवं निदेशक पशुपालन ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव वैज्ञानिकों को दिया। इसे विश्वविद्यालय का सौभाग्य ही कहा जाएगा की एस राष्ट्रीय सेमिनार में तीन कुलपति ओं ने अपने सुझाव दिए। कुलपति प्रोफेसर जे.एस. संधू ने जलवायु परिवर्तन को चुनौती के रूप में स्वीकार कर खेती एवं पशुपालन करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बदलते मौसम के अनुरूप किसान खेती कर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। नाबार्ड की जिला मैनेजर अयोध्या डॉ पोतदार द्वारा तीनों कुलपतिओं को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर परंपरागत ढंग से किया गया कार्यक्रम का संचालन डॉ सत्य व्रत सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर सुशांत श्रीवास्तव ने किया।
इस मौके पर मुख्य रूप से निदेशक प्रसार डॉ एपी राव ,पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ वीके सिंह, अधिष्ठाता उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय डा बिक्रमा प्रसाद पाण्डेय, डॉ भूपेंद्र सिंह, डॉ जेपी सिंह, डॉक्टर आर पी सिंह ,डॉक्टर आरआर सिहं डॉ आर के दोहरे ,डॉ रमेश चन्द्र कर्दम, डॉ अमित कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के सभी विभाग के अधिष्ठाता एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

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