-नींद में खलल, बन रहा स्लीप-डिप्राइव्ड सिंड्रोम, नींद है ब्रेन बैटरी चार्जर
अयोध्या। उमस भरी गर्मी व बिजली की आंख-मिचौली का मनोशारीरिक दुष्प्रभाव पिछले तीन सप्ताह में तेज़ी से बढ़ा है। ब्रेन का टेम्परेचर रेगुलेटर- हाइपोथैलमश शरीर के तापमान को 37 डिग्री सेल्सियस बनाये रखता है, परन्तु वातावरणीय तापमान अधिक होने पर यह पसीने से व रक्त वाहिकाओं को शिथिल कर बॉडी-टेम्परेचर को बनाये रखने का प्रयास करता है।
लम्बे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर ब्रेन हीट-स्ट्रेस में जाने लगता है जिसके व्यवहारिक,भावनात्मक व शारीरिक दुष्प्रभाव दिखते हैं जिसकी बानगी चिड़चिड़ापन, गृह-क्लेश, कार्यस्थल-संघर्ष, सामाजिक-उग्रता, आदि रूप में दिखती है जिसे हीट-स्ट्रेस न्यूरोसिस कहा जाता है।
लक्षण व दुष्प्रभाव:
बिजली के बार बार कटने या गायब रहने पर हीट-स्ट्रेस न्यूरोसिस के दशा बनती है जिसमे स्ट्रेस-हार्मोन कार्टिसाल व एड्रेनलिन लगातार बढ़े रहने से नींद की लयबद्धता दुष्प्रभावित होने से नींद में चौकना,चीखना,धड़कन तेज़ होना व स्लीप पैरालिसिस जैसे लक्षण शामिल हैं।
इसके डे-टाइम दुष्प्रभावों में अनमनापन,एकाग्रता में कमीं, चिड़चिड़ापन,थकान, सरदर्द, बदहजमी, एसिडिटी, बेचैनी, सीने में दर्द,आक्रामकता,उदासी,सुस्ती जैसे लक्षण भी दिख रहें हैं क्योंकि पर्यात नींद से ही ब्रेन बैटरी चार्ज होती है।
सलाह:
जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन के अनुसार मस्तिष्क के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस का वातावरणीय तापमान व पर्याप्त वेंटीलेशन जरूरी है। उचित तापमान व वेंटिलेशन का प्रबंधन इस प्रकार किया जाय कि निद्रा कम से कम दुष्प्रभावित हो। हीट-स्ट्रेस न्यूरोसिस के लक्षणों के प्रति सजग रहें तथा समस्या पढ़ने पर मनोपरामर्श अवश्य लें।