-एसएसपी को दिया विवेचक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश, सीओ स्तर से उच्च अधिकारी से अग्रिम विवेचना करवाने का आदेश
अयोध्या। इनायत नगर थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले देवचंद को मारपीट कर घायल करने के मामले में विवेचक ने सरसरी तौर पर विवेचना करके आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत कर दिया । मॉनिटरिंग आफ इन्वेस्टिगेशन में कोर्ट की ओर से दिए गए दिशा निर्देश को भी विवेचक ने नहीं माना तथा मेडिकल प्रपत्रों को विवेचना में शामिल ही नहीं किया। वादी की ओर से दी गई अर्जी पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को संपूर्ण प्रकरण की अग्रिम विवेचना किसी पुलिस क्षेत्रा धिकारी स्तर से वरिष्ठ अधिकारी से 2 माह के अंदर कराये जाने का आदेश दिया है। विवेचक दिवाकर पांडेय की विवेचना में संदिग्ध भूमिका की आवश्यक जांच कर कर उनके विरुद्ध कार्रवाई किए जाने और कार्रवाई से न्यायालय को भी अवगत कराए जाने का आदेश दिया है आदेश की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी भेजने का आदेश हुआ है। यह आदेश अपर मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट तृतीय की अदालत से हुआ है।
अधिवक्ता वीरेंद्र यादव अंकुर शुक्ला प्रत्यूष भट्ट ने बताया कि 16 फरवरी 2025 को इनायत नगर थाना क्षेत्र के कोडा हिसामुद्दीन पुर गांव में देवचंद को लाठी डंडे से पीट कर मरणासन्न कर दिया गया। मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट राहुल कुमार यादव की ओर से अभियुक्त अंकित कुमार, विनय उर्फ बिन्नी व चांदनी के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। घायल का मेडिको लीगल 16 फरवरी 2025 को सीएचसी मिल्कीपुर तथा 17 फरवरी 2025 को जिला अस्पताल अयोध्या में हुआ। मेडिकल रिपोर्ट और एक्स-रे रिपोर्ट सीटी स्कैन विवेचना में शामिल करने के लिए मॉनिटरिंग आफ इन्वेस्टिगेशन की अर्जी पर कोर्ट ने विवेचक को दिया था।
लेकिन विवेचक ने इन प्रपत्रों को विबेचना में शामिल नहीं किया और सरसरी तौर पर विवेचना करके आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोप है कि विवेचक ने यह कृत्य अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उनसे दुरभि संधि करके किया। इस पर वादी ने निष्पक्ष विवेचना हेतु विवेचक को न्यायालय में तलब करके आदेश देने की अर्जी दी थी। आरोप लगाया था कि कोर्ट के आदेश के बाद भी विवेचक द्वारा जानबूझकर निष्पक्ष विवेचना नहीं की जा रही थी ।घायल देवचंद 16 फरवरी2025 से 23 मार्च 2026 तक बेड पर रहा और 23 मार्च को उसकी मौत कुमारगंज अस्पताल में हो गई। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है की घटना के तत्काल बाद घायल को जिला अस्पताल अयोध्या के लिए एक्सरे परीक्षण हेतु 20 फरवरी 2025 को रेफर किया गया। विवेचक का यह दायित्व था कि वह अबिलंब घायल का अग्रेतर परीक्षण हेतु जिला अस्पताल को ले जाए ।
लेकिन उसने ऐसा नहीं किया विवेचक की निष्क्रियता के परिणाम स्वरूप वादी मुकदमा विवश होकर घायल देवचंद का इन्दू स्कैन सेंटर, सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल परीक्षण कराया जिसकी रिपोर्ट पत्रावली पर संलग्न है किंतु विवेचक द्वारा गैर जिम्मेदाराना तरीके से मेडिकल प्रपत्रों को विवेचना का भाग नहीं बनाया गया। यह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि एक संवेदनाहीन विवेचक घायल के शरीर पर आई चोटों के संबंध में आवश्यक मेडिकल प्रपत्रों जो घटना के समय की है को विवेचना का भाग न बनाते हुए लगभग 3 महीने पश्चात वादी मुकदमा से पूछा जाता है कि तुम चुटहिल का सीटी स्कैन करवाओगे अथवा नहीं।
मेडिकल प्रपत्रों, एक्स-रे रिपोर्ट को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि अभियुक्त गण द्वारा देवचंद को गंभीर चोटें कारित की गई अभियुक्तों द्वारा चोटहिल के शरीर पर इतनी गंभीर चोटें पहुंचाई गई जिससे देवचंद 16 फरवरी 2025 से 23 मार्च 26 तक बेड पर ही पड़ा रहा और कभी बेड से उठ नहीं सका। वह पूर्ण रूप से विकलांग हो गया और इसी से उसकी मृत्यु हो गई। विवेचक द्वारा भेजे गए आरोप पत्र तथा वादी की ओर से प्रस्तुत साक्ष के अवलोकन से प्रतीत होता है कि विवेचक ने जानबूझकर मुलजिमों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सरसरी तौर पर विवेचना की है ताकि अभियुक्त गंभीर धाराओं में अभियोजित न किए जाएं।
इसी उद्देश्य से सीएचसी मिल्कीपुर के मेडिकल रिपोर्ट तथा जिला अस्पताल से एक्सरे रिपोर्ट को जानबूझकर विवेचक ने विवेचना का भाग नहीं बनाया और थाने पर बैठे-बैठे ही टेबल पर काम करके वादी मुकदमा का बयान लगभग 3 माह बाद दर्ज किया। घायल देवचंद का सीटी स्कैन नहीं कराना विवेचक की कार्य संस्कृति असंतोष जनक एवं आपत्तिजनक है।