– डिजिटल डोपामिन बढ़ा रही इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर , जागरूकता व उपचार से सम्भव है सुधार

अयोध्या। बच्चों व किशोरों में आत्मघाती रिस्क बिहैवियर की बढ़ती मनोवृत्ति के कारक पहलुओं में इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर जिम्मेदार है जिसमें डिजिटल उत्तेजक लत उत्प्रेरक का कार्य करता है जिसे अब डिजिटल ड्रग कहा जाने लगा है। डिजिटल लत की चार स्टेज होती है। स्टेज वन डिजिटल कंटेंट के ख्याल में खोए रहना, स्टेज टू में औसत डिजिटल एक्सपोजर का बढ़ना, स्टेज थ्री में तलब को रोकने में बेचैनी तथा चौथा स्टेज फोर में लत पूरी न हो पाने या उसमें रोक टोक पर उग्रता दिखती है।
डिजिटल ओवर एक्सपोसर से दिमाग़ में उत्तेजना रसायन डोपामिन में अति वृद्धि से उनका इमोशनल सेंटर एमिग्डाला अति सक्रित तथा ब्रेन ब्रेक का काम करने वाला हिस्सा प्री फ्रंटल कोर्टेक्स कमजोर होने लगता है और फिर किसी बात की प्रतिक्रिता घातक रूप में हो सकती है। इस व्यवहार को अपोजिशनल डिफायन्ट डिसऑर्डर-ओडीडी कहा जाता है जिसमें अभिभावक,शिक्षक आदि द्वारा रोक टोक की प्रतिक्रिया हिंसक या आत्मघाती रूप में दिख सकती है। इतना ही नही, फ्रेंडशिप-ब्रेकअप, अकादमिक-कांफ्लिक्ट, फैमिली डिसहार्मोनी, फाल्टी पेरेंटिंग, पीयर प्रेशर, नशे की लत आदि रिस्क बिहैवियर के ट्रिगर बनते हैं।
सुझाव:
अभिभावक व शिक्षक किशोर की गतिविधियों पर मैत्रीपूर्ण व पैनी नजर रखते हुए स्कूल व फैमिली में स्वस्थ संवाद बनाते हुये स्वस्थ गतिविधियों को बढ़ावा दें। डिज़िटल डिटॉक्स के लिये इमोशनल अवेयरनेस के साथ रोल मॉडलिंग करें। गुमशुम,आक्रामक व अन्य असामान्य व्यवहार बने रहने पर मनोपरामर्श लेने में संकोच न करें। ज़ेन ज़ी युवाओं में बढ़ रही आवेशी मनोविकार व आत्मघाती रुझान जागरूकता हेतु शैक्षिक-संस्थान कार्यशाला श्रृंखला के तहत टाइनी टॉट्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित सत्र मे यह बाते डा आलोक मनदर्शन ने बतायी। निदेशिका बिन्नी सिंह की अध्यक्षता तथा आशा तिवारी के संयोजन तथा एकता भूटानी के संचालन में सम्पन्न सत्र में फैकल्टी व स्टाफ मौजूद रहे।