फैजाबाद मण्डल कारागार के जेलर पर लगा गम्भीर आरोप

जेलर पर दो लाख रूपये सुविधा शुल्क व प्रताड़ना का आरोप

कारागार से मुक्त होने के बाद पीड़ित ने लगायी न्याय की गुहार

फैजाबाद। मण्डल कारागार के जेलर डा. विनय कुमार दूबे के विरूद्ध जबरन वसूली, भ्रष्टाचार, अनियमितता तथा प्रताड़ना सहित कई अन्य गम्भीर आरोपों की शिकायत का मामला सामने आया है। यह शिकायत कारागार में निरूद्ध रहे बन्दी की ओर से मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियांे से की गयी है। शिकायत पर जांच भी शुरू हो गयी है। रविवार को पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक सिंह की अगुवायी मंे आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान शिकायतकर्ताओं ने इसका खुलासा किया।
जनपद अमेठी निवासी राजेश विक्रम सिंह पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि वर्ष 2017 में उनके विरूद्ध दर्ज हुए एक मुकदमें के बाद वह सुल्तानपुर जेल में बन्द थे। वर्ष 2018 के मार्च महीने में उनका स्थानान्तरण सुल्तानपुर से मण्डल कारागार फैजाबाद कर दिया गया। यहा निरूद्ध रहने के दौरान जेलर डाॅ0 दूबे द्वारा उन्हें मारपीट कर काफी प्रताड़ित किया गया। इस बीच जब उन्होंने जेलर से साफ खाना दिलाये जाने की प्रार्थना की तो जेलर ने साफ खाने के एवज में उनसे 1 लाख रूपये की मांग की। मुलाकातियों के सामने यह बात रखने तथा जेलर को दो बार में एक-एक लाख रूपये देने के बाद उन्हें जेलर की प्रताड़ना से मुक्ति तथा विशेष सुरक्षा कक्ष में रहने, कारागार में बाहर से भोजन उपलब्ध कराना तथा अन्य सुविधाएं मिल सकी इस बीच उनका स्थानान्तरण मण्डल कारागार से प्रतापगढ़ जेल कर दिया गया। जेलर डा0 दूबे के पास उनका बीस हजार रूपया जो लिखा पढ़ी में जमा था उसे भी जेलर द्वारा हड़पने का प्रयास किया गया और उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर जेल में ही हत्या करा देने की धमकी दी गयी किन्तु जेल अधीक्षक के सामने यह पूरा मामला जाने के बाद जेलर द्वारा हड़पा गया बीस हजार रूपया डर व मजबूरी के चलते उन्हें मनी आॅर्डर के जरिये प्रतापगढ़ में भेजना पड़ा। शिकायतकर्ता के अनुसार जेलर द्वारा कारागार के कई बन्दियों से इस तरह की जबरन वसूली कर कारागार में भ्रष्टाचार का साम्राज्य स्थापित कर लिया गया है जबकि जेल के बैरिकों की हालत खराब है। हालही में एक बैरिक पर पेड़ गिर जाने के कारण उसकी हालत जर्जर बनी हुई है जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है लेकिन जेलर से इसका कोई सरोकार नहीं है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर जेलर के भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की शिकायत करने वाले सुल्तानपुर जिले के निवासी गौरव सिंह ने आरोप लगाया कि जेलर डाॅ0 दूबे मण्डल कारागार को व्यवसायिक केन्द्र के रूप में संचालित कर रहे हैं। उनके अनुसार जेलर डाॅ. दूबे नये बंदियों को प्रताड़ित कर काम कराने के नाम पर उनमें खौफ पैदा कर अवैध वसूली की मांग करते हैं तथा इस अवैध वसूली/सुविधा शुल्क न देने पर बंदियों से जबरन काम लेकर और उन्हें खराब भोजन देकर प्रताड़ित करते हैं। मजबूरी में बंदियों को अपने मुलाकातियों और पैरोकारों से खाने का सामान मंगाना पड़ता है। यही नहीं कारागार में बंदियों के बीमार हो जाने पर उन्हें मरणासन्न होने पर गंदगी में ही रखकर प्रताड़ित किया जाता है और बंदी की मृत्यु हो जाने पर इस मृत्यु को रास्ते में होना दिखा दिया जाता है। जेलर डाॅ0 दूबे की सरपरस्ती में कारागार के अन्दर घटिया एवं अपूर्ण निर्माण कार्य कराया जा रहा है। भौतिक रूप से यह कार्य कारागार के बंदियों से कराया जा रहा है लेकिन कागजों में यह कार्य मजदूरों से कराना दिखाकर धोखाधड़ी से अवैध धनउगाही की जा रही है। जेलर के निर्देश पर कारागार के सी0सी0टी0वी0 कैमरों को जानबूझ कर खराब कर नियम विरूद्ध तरीके से मुलाकात करायी जाती है। तलाशी के नाम पर वैध चीजों को रोका जाता है और पैसा लेकर छोड़ दिया जाता है। हाल ही में जेल में करीब दस लाख रूपये का कबाड़ बेचा गया है और यह पैसा डकार लिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया।
वहीं आॅनलाइन पोर्टल पर की गयी शिकायतकर्ता की शिकायत पर पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर जांच भी शुरू हो गयी लेकिन जांच के आरोपी वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण जिला पुलिस ने जांच में अक्षमता जाहिर की है। शिकायत की जांच करने वाले कोतवाली नगर के उपनिरीक्षक मारकण्डेय सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट में आरोप जेल प्रशासन के जेलर के विरूद्ध होने के कारण प्रकरण की जांच उनके स्तर से कराया जाना उचित न होने तथा प्रार्थना पत्र की जांच जेल प्रशासन के किसी उच्चाधिकारी से कराने की रिपोर्ट दी है। इधर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक सिंह ने भी जेल प्रशासन पर छात्र नेताओं की प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उनके अनुसार कारागार में निरूद्ध संगीन अपराधों के बंदियों को पैसे के बल पर बेहतर सुविधाएं मुहैय्या करायी जा रही है जबकि छोटे मामलों में निरूद्ध छात्र नेताओं का जेल स्थानान्तरित कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने इस प्रताड़ना के विरूद्ध मुख्यमंत्री व मानवाधिकार आयोग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत करने की बात कही है।

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