-अब हार्माेन रोगों का मिलेगा विशेषज्ञ उपचार
अयोध्या। राजकीय मेडिकल कॉलेज अयोध्या में एंडोक्राइनोलॉजी ओपीडी का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्ताेलिया ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. विमलेश वर्मा, वीरेंद्र वर्मा सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे। नई ओपीडी के शुरू होने से अब मधुमेह, थायरॉयड, मोटापा, हार्माेन डिसऑर्डर, पिट्यूटरी ग्रंथि संबंधी रोग, अनियमित पीरियड्स, हड्डी एवं मिनरल डिजीज, पोस्ट-मेनोपॉजल ऑस्टियोपोरोसिस, बच्चों की ग्रोथ समस्या, गैलेक्टोरिया, गाइनेकोमेस्टिया तथा मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसे एंडोक्राइन रोगों का विशेषज्ञ उपचार मेडिकल कॉलेज में ही उपलब्ध हो सकेगा।
सहायक प्रोफेसर डॉ. आदर्श कुमार सोनकर ने बताया कि वर्तमान समय में हार्माेन संबंधी रोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक मरीजों को उपचार के लिए बड़े संस्थानों में रेफर करना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त आवश्यकता होती थी। एंडोक्राइनोलॉजी ओपीडी शुरू होने से रोगियों को शीघ्र निदान एवं समुचित उपचार की सुविधा मिलेगी तथा अनावश्यक रेफरल में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक रूप से ओपीडी का संचालन सप्ताह में दो दिन बुधवार एवं शनिवार को किया जाएगा। भविष्य में रोगी भार एवं संस्थागत आवश्यकता के अनुसार इस सेवा का विस्तार भी किया जाएगा।
जिला अस्पताल के संविदा चिकित्सकों ने मेडिकोलीगल केस करने पर जताया एतराज
अयोध्या। जिला चिकित्सालय में संविदा पर तैनात डॉक्टरों ने मेडिको लीगल केस करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर कहा है कि सरकारी आदेशों के अनुसार यह काम केवल नियमित चिकित्सकों का है, न कि संविदा डॉक्टरों का।
डॉक्टरों ने 13 मई को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि उन्हें जबरन मेडिको लीगल केस, रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट, बर्न इंजरी, फिजिकल असॉल्ट, गन शॉट, पॉइजनिंग आदि मामलों के इंजरी रजिस्टर में नोटिंग करने और संबंधित दस्तावेज तैयार करने को कहा जा रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत तैनात आकस्मिक चिकित्सकों का काम केवल पीएमएस (नियमित) चिकित्सकों की सहायता करना है, न कि स्वयं मेडिको लीगल केस संभालना। जिला अस्पताल के मुख्य अधीक्षक के मौखिक आदेश पर संविदा डॉक्टरों को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा रही है।
संविदा चिकित्सकों के गवर्नमेंट ऑर्डर में स्पष्ट है कि उन्हें मेडिको लीगल केस नहीं करने हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई कानूनी जटिलता या परेशानी होती है तो उसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश सिंह से अनुरोध किया है कि सभी संविदा डॉक्टरों को मेडिको लीगल केस न करने का लिखित आदेश जारी किया जाए। पत्र पर डॉ. आशीष पाठक, डॉ. वीरेंद्र वर्मा, डॉ. आशुतोष प्रताप सिंह, डॉ. विशाल चौधरी, डॉ. पंकज कुमार और डॉ. प्रमोद तिवारी समेत छह संविदा डॉक्टरों के हस्ताक्षर हैं।