किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार मेरी प्राथमिकता : डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह

by Next Khabar Team
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-आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के नवागत कुलपति ने संभाला कार्यभार


मिल्कीपुर । आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के नवनियुक्त कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित नरेंद्र उद्यान में आचार्य नरेंद्र देव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा चंदन का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने उनका फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद कुलपति ने विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाताओं, निदेशकों, वैज्ञानिकों और शिक्षकों के साथ बैठक कर विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को वर्तमान स्वरूप तक पहुंचाने में पूर्व कुलपतियों और वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में शिक्षा, शोध और प्रसार गतिविधियां सर्वोच्च प्राथमिकता रहेंगी। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों को विश्वविद्यालय की आधारशिला बताते हुए कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसानों तक सही तकनीक और जानकारी नहीं पहुंचती है तो विश्वविद्यालय अपने उद्देश्य पूरे नहीं कर सकेगा।

कुलपति ने शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक परियोजनाएं लाने पर जोर दिया। साथ ही ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कक्षाओं की डिजिटल मॉनीटरिंग प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रयोगशालाओं, छात्रावासों तथा आकस्मिक और चिकित्सीय अवकाश की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर बल दिया, जिससे प्रशासनिक कार्यों में सुगमता और दक्षता बढ़ सके। उ
न्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि रामचरितमानस के सुंदरकांड में वर्णित चौपाई का जिक्र करते हुए कहा कि सचिव, वैद्य, गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस। राज, धर्म, तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥

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अर्थात मंत्री, वैद्य और गुरु – ये तीन यदि किसी भय अथवा लाभ की आशा (लालच) में केवल मीठा या प्रिय बोलते हैं और कड़वा (हितकारी) सच छिपाते हैं, तो क्रमशः राज्य (या संस्था), धर्म (या विवेक) और शरीर (या स्वास्थ्य) का बहुत जल्द सर्वनाश हो जाता है।

अर्थात हमको मीडिया की खबरों को एक आईना मानकर चलना है।हमारा मीडिया से बहुत गहरा नाता रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, कर्मचारियों की नियमित एवं ससमय उपस्थिति,किसानों को तकनीकी जानकारियां मिल सकें, कम लागत में किसानों को ज्यादा मुनाफा मिले यही प्राथमिकता होगी। आगामी एक माह के अंदर विश्वविद्यालय में बदलाव दिखाई पड़ेगा। ईऑफिस इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिंगल विंडो सिस्टम पूरी तरह से विश्वविद्यालय में लागू किया जाएगा जिसके माध्यम से किसानों को एक ही स्थल पर बीज खाद दवा सहित कृषि संबंधी जानकारियां मिल सकेंगी।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संबद्धीकरण कतई नहीं चलेगा। योग्य एवं पात्र कर्मचारियों एवं वैज्ञानिकों की नियुक्ति रिक्त पदों के सापेक्ष की जाएगी। अब विश्वविद्यालय में लंच का समय 1:00 बजे से 1:30 बजे तक ही होगा। उन्होंने कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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