दलित एक्ट व आरक्षण के विरोध में आन्दोलन करेगी क्षत्रिय महासभा: डा. एच.बी. सिंह

    • कहा- लखनऊ में 9 सितम्बर को होगा राष्ट्रीय स्तर का आन्दोलन

    • अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (यूथ) के पदाधिकारियों को वितरित किया मनोनयन पत्र

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    फैजाबाद। दलित एक्ट और जातीय आधार पर आरक्षण भारतीय संस्कृति की वासुदेव कुटुम्बकम की अवधारणा को नष्ट करने वाला कानून है जो सवर्णों के साथ अन्य जातियों के अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी है ऐसे एक्ट व आरक्षण के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा आन्दोलन करेगी। उक्त विचार शाने अवध सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. एच.बी. सिंह ने व्यक्त किया।
    इसके पूर्व अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा(यूथ) का पदाधिकारी मनोनयन पत्र वितरण महासभा के यूथबिंग के जिलाध्यक्ष अमरेंद्र सिंह द्वारा सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एच.बी सिंह. रहे और अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर सिंह ने किया। इस दौरान सरकार के दलित एक्ट की कड़े शब्दों में मौजूद सभी लोगों ने निंदा की और इसे समाज को तोड़ने वाला काला कानून बताया। कार्यक्रम में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर सरकार पर दबाव बनाने की बात पर चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने कहा कि दलित एक्ट और जातीय आधार पर आरक्षण भारतीय संस्कृति की वासुदेव कुटुम्बकम की अवधारणा को नष्ट करने वाला कानून है जो सवर्णों के साथ अन्य जातियों के अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी है। हम सबको मिलकर इसका भरपूर विरोध करना चाहिए,और सरकार अगर नही मानी तो आगामी चुनाव में सर्वसमाज आईना दिखाने का काम अवश्य करेगा।
    प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर सिंह व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. एच बी सिंह ने अपने संयुक्त बयान में बताया कि सरकार के दलित एक्ट व आरक्षण के विरोध में आगामी 9 सितंबर को लखनऊ में राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन किया जा रहा है जो कि उपरोक्त संदर्भ में निर्णायक आंदोलन होगा व अगर सरकार ने मांगे नही मानी तो यह आंदोलन भाजपा सरकार के लिए ताबूत की आखिरी कील भी साबित होगा। डॉ. सिंह ने कहा कि अयोध्या-फैजाबाद से अधिकाधिक संख्या में लखनऊ सम्मेलन में क्षत्रिय सम्बर्ग के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कराई जाएगी। कार्यक्रम में रुदौली ब्लॉक प्रमुख सर्वजीत सिंह, चाणक्य परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक कृपानिधान तिवारी,भाजपा पार्षद दिलीप यादव व श्याम लाल शाहू के खिलाफ फर्जी तौर पर दलित एक्ट लगा कर प्रशासन द्वारा उत्पीड़न का भी जोरदार विरोध किया गया।