स्वार्थी होना पशुता का परिचायक:मुकुल कानिटकर

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  • भारतीय शिक्षण मण्डल अवध प्रान्त के स्थायी सदस्यों का हुआ सम्मेलन

  • उदयीमान भारत में कार्यकताओं की भूमिका” विषयक हुई संगोष्ठी

फैजाबाद। समर्पण त्याग के बिना महान कार्य नहीं हो सकता, स्वार्थी होना पशुता का परिचायक है। कार्यकर्ता बनना सीधे मनुष्य बनने की शुरूआत है। जो विद्या मुक्त नहीं करती वह तकनीक है। ऐसी मुक्त दायिनी विद्या को एक बार पूरी दुनिया में प्रतिस्थापित करने का जिसने संकल्प लिया है, वह भारतीय शिक्षण मण्डल का कार्य करता है। मनुष्यता व पशुता में स्वातन्त्रय का अन्तर है। संकल्प जब कर्म में उतर जाता है तो वह व्रत होता है, मन, वचन, कर्म की एकात्मकता से ही कोई लक्ष्य पाया जा सकता है। उक्त विचार भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने सोमवार को डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यसाय व प्रबन्ध उद्यमिता विभाग के सभागार में आयोजित भारतीय शिक्षण मण्डल के अवध प्रान्त के प्रान्तीय कार्यकारिणी के स्थायी सदस्य सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किया।
भारतीय शिक्षण मण्डल के अवध प्रान्त के प्रान्तीय कार्यकारिणी स्थायी सदस्य सम्मेलन में आयोजित ”उदयीमान भारत में कार्यकताओं की भूमिका” विषयक संगोष्ठी में कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए श्री कानिटकर ने कहा कि समूचे विश्व को मानवता का संदेश देने व विश्व कल्याण के लिए भारत का जन्म हुआ है। भारत का सूर्य उग चुका है भारत माता ने अंगड़ाई ले ली है, भारत का नव स्वतंत्रता दिवस 21 जून 2015 को अन्र्तराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में आ चुका है। जब दुनिया के 193 देशों में ऊं की ध्वनि एक साथ गूंजी। यह सनातन धर्म का ही सामथ्र्य है कि दुनिया के विभिन्न धर्मों को मानने वाले देश अपनी उपासना पद्यति से परे जाकर उसे ग्रहण किये। भारत में जब तक शिक्षा व्यवस्था ठीक थी भारत समृद्व था। जीवन का समर्पण सबसे बड़ा समर्पण है। कार्यकर्ता ऐसा होना चाहिए जिसे देखकर प्रेरणा मिलती हो। जब तक प्रतिफल की आशा रहेगी तक कार्यकर्ता नहीं बना जा सकता। कार्यकर्ता की भूमिका बताती है कि अकेले कार्य नहीं किया जा सकता कोई भी कार्य संगठित होकर ही किया जाता है। दायित्व के साथ कार्य होना चाहिए कार्यकर्ता जब अपना दायित्वबोध महसूस करेगा तब भारत माता विश्व गुरू बनेगी।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलगुरू आचार्य मनोज दीक्षित ने सम्मेलन में आये सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और सदस्यों का स्वागत अभिनन्दन करते हुए कहा कि हम सबको संगठित होकर संकल्प लेना होगा जिससे हम सिद्वी तक पहुंच सके। भारतीय होने पर आप को गर्व इस बात पर होना चाहिए कि आप उस शक्तिकुंज का हिस्सा है जो सर्व शक्तिमान है। कुछ समय पहले वह लिंक टूट गई है जिसे हमें जोड़ना है पूरा विश्व आज आपकी तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहा है कि आप अपनी शक्ति को पुनः जागृत कर पूरी दुनिया को मानवता का संदेश देने में सफल रहे। आपके पास जो ज्ञान की पिपासा है वही सही दिशा में जाये इस लिए यह सम्मेलन है। यह राह आसान नहीं है, पर कठिन भी नहीं है। इस कंटिकाकीर्ण मार्ग को प्रभु सरल बनाये यही हमारी कामना है।
संगोष्ठी का विषय परिवर्तन करते हुए भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डाॅ0 ओम प्रकाश सिंह ने सम्मेलन में उपस्थित कार्यकर्ताओं को भारतीय शिक्षण मण्डल के स्थापना, उद्देश्य और लक्ष्यों से परिचित कराया। अवध प्रान्त में भारतीय शिक्षण मण्डल के विस्तार और उसके लक्ष्यों के सिद्वी में डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलगुरू आचार्य मनोज दीक्षित व अवध प्रान्त के मंत्री डाॅ0 दिलीप सिंह के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना किया। उन्होंने      कार्यकर्ताओं को चेताते हुए कहा कि आपको यह समझना होगा कि हमें समाज के लिए कार्य करना है। शिक्षण मण्डल ने हमें नया जीवन दिया है इससे जुड़ेने के बाद आपका जीवन परिवर्तित हो सकता है, यह जीवन जीने की कला सिखाता है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के प्रति क्षोभ व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज आधुनिक शिक्षा व्यवस्था व्यक्तित्व निर्माण नहीं पैसा पैछा करने की मशीन बनाने का काम कर रही है। सेल्फ व सेल्फी का कार्य बहुत तेजी से हो रहा है। हमारा उद्देश्य शिक्षा में जीवन के मुल्यों की स्थापना और गिरते हुए शिक्षा स्तर को उठाना है। भारतीय शिक्षण मण्डल शोध, प्रबोधन, प्रशिक्षण, प्रकाशन, संगठन 5 बिन्दुओं पर अपना ध्यान केन्द्रित कर कार्य कर रहा है। हमारा गुरूकुल प्रकल्प वेद, विज्ञान, योग, कला कृषि सभी पांचों विषयों की शिक्षा देने का कार्य करेगा।
सम्मेलन के पूर्व आये हुए अतिथियों का परिचय व्यवसाय व प्रबंध के विभागाध्यक्ष व भारतीय शिक्षण मण्डल के संरक्षक आचार्य राम नयन राय द्वारा किया गया। तदोपरान्त मुख्य अतिथि डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलगुरू आचार्य मनोज दीक्षित, मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर सहित अतिथियों ने मां सरस्वती के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित व दीप प्रज्जवलन कर सम्मेलन की औपचारिक शुरूआत की। ततपश्चात आयोजक मण्डल द्वारा अतिथियों को बैज, अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
सम्मेलन में भारतीय शिक्षण मण्डल अवध प्रान्त के अध्यक्ष पाण्डेय राजीव नयन, मंत्री डाॅ0 दिलीप सिंह, संरक्षक आचार्य राम नयन राय, आचार्य लक्ष्मीकान्त सिंह, आचार्य के0 के0 वर्मा, आचार्य राजेश कुमार सिंह, आचार्य रमापति मिश्र, विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य ज्ञान प्रकाश टेकचनदानी सरल, डाॅ0 वंशराज मौर्या, डाॅ0 सुनीता सेंगर, प्रान्तीय महामंत्री सुमधुर, गुरू वशिष्ठ न्यास के अध्यक्ष कमलेश सिंह, विनय कुमार श्रीवास्तव, प्रान्त उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह, सहमंत्री गोण्डा राजेश सिंह, रमेश सिंह, सह प्रकाशन प्रमुख रोहित पाण्डेय, अजय, पवन नन्दा, प्रशासनिक अधिकारी डाॅ0 श्रीष अस्थाना, कपिल देव, वंदिता पाण्डेय, प्रियंका श्रीवास्तव, शिक्षा जैन, बृजेश भारद्वाज, दिलीप तिवारी, परिमल तिवारी, विजय प्रताप सिंह बंटी, विनीत सिंह, संजीत पाण्डेय, प्रवीण राय, कविता श्रीवास्तव, अनुराग तिवारी, जूलियस कुमार, सूरज सिंह आदि सदस्यगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन व्यवसाय प्रबन्ध के प्राध्यापक एवं स्थायी सदस्य डाॅ0 निमिष मिश्रा द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन पुस्तकालयाध्यक्ष व भारतीय शिक्षण मण्डल के संरक्षक आचार्य आर0 के0 सिंह ने किया। सुमधुर जी द्वारा एकल गीत चन्दन है इस देश की माटी…. तपोभूमि हर ग्राम है…. हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है… व राष्ट्रीय गीत सुनाकर सभी का मन मोह लिया।

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