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कृषि विवि प्रशासन ने छात्रों का निष्कासन लिया वापस

-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तेवर देख विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ पांव फूले

मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अध्यनरत आठ छात्र-छात्राओं के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई दंडात्मक कार्यवाही को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आंदोलन के आगे आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन को मुंह की खानी पड़ गई है। नाराज एवं आक्रोशित छात्रों के तेवर देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने आखिरकार यू टर्न ले लिया है। जिसके क्रम में छात्रों के विरुद्ध विश्वविद्यालय एवं छात्रावास से निष्कासन सहित अन्य कार्यवाही को समाप्त करते हुए उन्हें चेतावनी देकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने समूचे प्रकरण पर विराम लगा दिया गया है।

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बता दें कि बीते 13 मई को एमएससी तृतीय वर्ष के छात्र यशपाल सिंह यादव का शव सरयू छात्रावास स्थित उसके कमरे में छत से लटका मिला था। इसके बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर व छात्र के गाइड डॉ विशुद्धानंद के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय में जमकर प्रदर्शन किया था। छात्रों के प्रदर्शन से खार खाए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठ छात्र छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करते हुए उन्हें छात्रावास सहित विश्वविद्यालय से निष्कासित किए जाने का आदेश दे दिया था। इसके बाद छात्र-छात्राओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। कार्यवाही के शिकार छात्र-छात्राओं के समर्थन में एबीवीपी संगठन उतर आया था, और कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित खरीफ उत्पादकता गोष्ठी के उद्घाटन में पहुंचे प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के समक्ष जमकर हंगामा काटा था।

उधर दो दिन पूर्व एबीवीपी के प्रदेश पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर छात्रों के विरुद्ध की गई कार्यवाही वापस न लिए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दे दी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और उन्होंने बीते 29 जून को शाम 4ः00 बजे विश्वविद्यालय के विद्वत परिषद की आपात बैठक बुला ली थी। बैठक में कार्यवाही की जद में आए 7 छात्र छात्राओं विकास चौधरी, अश्वनी वर्मा, पंकज यादव, हर्षवर्धन सिंह, कामरान आजम, कु रंजना एवं कु सिदरा किदवई को भविष्य में पुनरावृत्ति न किए जाने की कड़ी चेतावनी दी गई है। जबकि विश्वविद्यालय से निष्कासित किए गए छात्र ऋषभ मिश्रा को शिक्षण सत्र 2024 – 25 के प्रथम सेमेस्टर के लिए छात्रावास से निष्कासित किया गया है।

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शेष शिक्षा अवधि में कंडक्ट प्रोवेशन पर रखे जाने का आदेश देते हुए उन्हें भी कड़ी चेतावनी दी गई है। वही अब विश्वविद्यालय प्रशासन की फजीहतों को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि काश विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ विजेंद्र सिंह एवं प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मामले का संज्ञान लेकर आक्रोशित छात्र-छात्राओं से वार्ता कर उन्हें समझाया बुझाया होता तो मामला तूल न पकड़ता और विश्वविद्यालय प्रशासन की किरकिरी न होती।

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