– ‘घर खाली हो गया’ लोकार्पित, खुश रंग लिफाफों में बचपन की चिट्ठियां पुस्तक का भी लोकार्पण
अयोध्या। पूनम सूद की कहानियों में रिश्तों को बचाए रखने की अपरिमित चेष्टा है। आशा की तरह बढ़ती हुई कहानियों का आयाम विस्तृत है। आज के समय में जो समस्याएं हैं उन्हें अगर ठहरकर नहीं देखा गया तो यह मानकर चलिए घर खाली होते जाएंगे। कहानियों में मनोवैज्ञानिक सूक्ष्म तंत्र स्पष्ट दिखते हैं । भारतीय स्त्रियों की दशा का पचासी प्रतिशत सच बयां करती है ‘मोहर्रम’ जैसी कहानी । एकाकीपन और संबंधों की घुटन का यथार्थ चित्रण कहानी में देखा जा सकता है।
उक्त विचार प्रख्यात कथा लेखिका एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड की अधिकारी डॉ. सोनी पाण्डेय के हैं वे ‘आपस न्यास’ अयोध्या द्वारा आयोजित साहित्यकार ‘पूनम सूद’ के सद्य: प्रकाशित कथा संग्रह ‘घर खाली हो गया’ के लोकार्पण परिसंवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।
इसके पहले कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। आपस के निदेशक डॉ. विंध्य मणि त्रिपाठी ने कहा- ‘घर खाली हो गया’ की कहानियों में संत्रास से उपजा हुआ विस्थापन विस्तृत रूप में दिखाई पड़ता है। कहानियों में विस्थापन का दर्द सभी पात्रों में व्याप्त है। रिश्ते जैसी कहानी इस टूटन को जोड़ने का प्रयास करती है। कहानी के पात्रों में लेखिका के अनुभूति पक्ष दिखाई देते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आलोचक प्रोफेसर रघुवंश मणि ने कहा- ‘पूनम’ की कहानियां संवेदना से भरपूर हैं। कहानी कभी पुरानी नहीं होती वह अपने समय का सच होती है। पूनम की कहानी एक केस स्टडी की तरह लगती हैं। भाषा में काव्यात्मकता का प्रभाव दिखता है। यथार्थ चित्रण के कारण लगभग सभी कहानियां परकाया प्रवेश जैसी दिखती हैं। काफी समय बीतने के बावजूद भी कहानियों की अर्थवत्ता और प्रासंगिकता आज भी निरंतर बनी हुई है।
कार्यक्रम के अंत में सोनी पांडे द्वारा संपादित पुस्तक ‘खुश रंग लिफाफों में बचपन की चिट्ठियां’ का भी लोकार्पण किया गया। निदेशक आपस ने सभी वक्ताओं अध्यक्ष और मुख्य अतिथि को अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया। इस लोकार्पण परिसंवाद कार्यक्रम में आकाशवाणी अयोध्या के केंद्र निदेशक अभियंता श्री अनिल सिंह,मीनू कपूर जया स्वरूप आदि ने अपने विचार व्यक्त किये।
शहर के शान-ए-वध होटल के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में साकेत कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप खरे, डॉ. असीम त्रिपाठी, डॉ विशाल श्रीवास्तव, विजय रंजन, डॉ. रजनीश, सुनीता सिंह, डॉ. परेश पांडेय कात्यायनी उपाध्याय, इंद्रमणि, डॉ. सुनीता पांडे, डॉ. नीलम सिंह, डॉ. स्वदेश मल्होत्रा, डॉ. अतुल मिश्र, डॉ. बुशरा खातून के साथ-साथ अनेक साहित्यकार बुद्धजीवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी के उद्घोषक विवेकानंद पांडे विवेक ने किया। लेखिका पूनम सूद जी ने सभी अतिथियों को आभार व्यक्त किया।