-‘पूर्वी उत्तर प्रदेश में सतत आजीविका के लिए अवसर, संभावनाएं एवं प्रबंधन’ विषय पर दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण का शुभारंभ

अयोध्या।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में ष्पूर्वी उत्तर प्रदेश में सतत आजीविका के लिए अवसर, संभावनाएं एवं प्रबंधन ष् विषय पर दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। उपकार के महानिदेशक डा. संजय सिंह, कुलपति डा. पी.एस. प्रमाणिक व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सह अधिष्ठाता डा. भानु प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न व बुके भेंटकर सम्मानित किया।
किसानों को संबोधित करते हुए उपकार के महानिदेशक डा. संजय सिंह ने कहा कि अमरुद के बाजारीकरण के लिए कार्य करने पर किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकता है। कहा कि उसे तोड़ने से पहले उसकी ग्रेडिंग करना होगा। किसानों को अमरुद की बागवानी के साथ-साथ उसके पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की जरूरत है, इससे किसानों को उचित दाम मिल सकता है। महानिदेशक ने कहा कि किसान अमरूद की खेती के साथ-साथ अन्य फसलों का प्रयोग करें, किसान अपनी आय को दोगुणी कर सकते हैं।
कुलपति डा. पी.एस प्रमाणिक ने कहा कि गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए पौधे का आकार एवं कटिंग बहुत जरूरी है। अमरुद को गरीबों का सेब भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कई प्रकार के महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं। कुलपति ने कहा कि आने वाले समय में सघन बागवानी से किसानों की आय दोगुणी करने में मदद मिलेगी।
वित्त नियंत्रक नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि अमरूद की खेती सबसे सस्ती और टिकाऊ है। यह अधिक मुनाफे वाली खेती है। अमरूद की खेती कर किसान अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। डा निरंजन के संयोजन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन डा. आर. के आनंद व कार्यक्रम का संचालन डा. आशीष सिंह ने किया। इस मौके पर विवि के वित्त नियंत्रक, समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएं एवं किसान मौजूद रहे।