-वर्जना व संकोच है मनोपरामर्श के अवरोध, यूथ-कनेक्ट सत्र में हुआ मनोस्वास्थ्य विमर्श

अयोध्या। वैश्विक स्तर पर हर 7 में से 1 व्यक्ति यानि 1.1 अरब से अधिक लोग मानसिक विकार से पीड़ित हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा लगभग बीस करोड़ आबादी का है। जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक व वर्जना के कारण दो तिहाई से भी अधिक मानसिक रोगियों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है।
आवेग,अपराधबोध, हताशा, अकादमिक व कैरियर स्ट्रेस, पैरेंटल प्रेशर, लवलाइफ कांफ्लिक्ट,सेक्सुअल एब्यूज, जुआ व नशा, डिप्रेशन, मूड-डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया आदि युवा मनोअगवापन के मुख्य कारक पहलू है। अकेलापन, प्रियजन मौत,आर्थिक हानि या कर्ज, कानूनी सजा, आपदा-महामारी, भुखमरी,गरीबी व गंभीर बीमारी आदि भी मनोआघात लाते हैं।
रुग्ण मनोदशा में ब्रेन इमोशन-सेंटर एमिग्डाला अति सक्रिय तथा इमोशनल-ब्रेक प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स अति कमजोर होने से व्यक्ति मनोअगवापन से ग्रसित हो घातक कृत्य पर भी उत्तारु हो सकता है। बेवफाई या पारिवारिक कलह आदि से जुड़े मामलों में सुसाइड या होमीसाइड की बढ़ती की बढ़ती प्रवृत्ति व डिजिटल दुनिया जनित उन्मादी व आत्मघाती लाइव स्ट्रीमिंग आदि का चलन स्थति को अति गंभीरता बना रहा है।
इन्ही गंभीरताओं के मद्देनज़र इस वर्ष विश्व मनोस्वास्थ्य दिवस-10 अक्टूबर की थीम है; सच्चे अनुभव की दास्तान व सच्चे बदलाव, यानि मनोविकारों के प्रति नजरिये को बदलना तथा चुप्पी,संकोच,वर्जना व मिथक को तोड़कर बातचीत, समानुभूति, उपचार व सहयोग के दृष्टिकोण को बढ़ावा देना। आकाशवाणी अयोध्या व डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित “यूथ-कनेक्ट” युवा मनोविमर्श कार्यक्रम में यह बातें डा आलोक मनदर्शन ने कही।
कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन व प्रो सुरेंद्र मिश्र व आशीष चतुर्वेदी के संयुक्त संयोजन में सत्र का प्रबंधन डॉ शिवांश कुमार व डॉ अंकित मिश्र व संचालन आज़ाद सदक व दिशा श्रीवास्तव ने किया जिसमें डा प्रतिभा त्रिपाठी व डा सरिता पाठक के सकारात्मक मनोविज्ञान उद्बोधनोंपरान्त युवाओं की जिज्ञासा व संशय का समाधान किया गया।