संसार आज एक डाॅट काॅम पर गया है सिमट: डाॅ. ए.के. राय

इण्टरनेट विधि एवं साइबर अपराध विषय पर हुआ व्याख्यान

रूदौली। रूदौली एजूकेशनल इंस्टीट्यूट, सरायपीर, भेलसर में इण्टरनेट विधि एवं साइबर अपराध विषय पर बी0एड्0 छात्र-छात्राओं के लिये व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें का0सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. अशोक कुमार राय ने कहा कि आज से हजारों वर्ष पूर्व भारत में उपनिषदों में यह वर्णित किया गया है “वसुधैव कुटुम्बकम्“ अर्थात् समस्त संसार एक परिवार है और आज इंटरनेट ने इस मूल मंत्र को सार्थक किया है, समस्त संसार आज एक डाॅट काॅम पर सिमट गया है। इंटरनेट के आगमन से बदल गया संसार और बदल गया भारत। आज भारत एक सूचना महाशक्ति के रूप में उदित हो रहा है, अमेरिका और चीन के पश्चात् इंटरनेट जनसंख्या के लिहाज से विश्व के तीसरे स्थान पर है। आज भारत में बिरले ही कोई हाथ ऐसा होगा जिसमें मोबाइल फोन न हो।
डाॅ. राय ने बताया कि दस हजार वर्ष पूर्व का कृषि प्रधान भारत अब एक सूचना समाज में संक्रमित हो रहा है जहाँ चकले बेलन के प्रकार से कम्प्यूटर और सेलफोन गृहस्थी का ही एक उपकरण बन चुके हैं। परन्तु प्रौद्योगिकी की इस उड़ान में कहीं पीछे छूट गये विधिक प्रावधान और विधिक परिपाटियाँ, जहाँ अपराध और दण्ड के बीच एक शून्य उत्पन्न हुआ और दाण्डिक क्रियायें कंुठित हो गयी है। ऐसा केवल भारत में नहीं हुआ अपितु समस्त विश्व प्रौद्योगिकी और विधि के बीच इस अन्तर से आश्चर्यचकित और पीड़ित है। डाॅ. राय ने कहा कि 1642 में गैर-अंकीय कम्प्यूटर का निर्माण कर ब्लेज पास्कल ने दुनिया को कम्प्यूटर की वर्णमाला का पाठ पढ़ाया। तत्पश्चात् 1941 में प्रथम विशालकाय कम्प्यूटर का आविष्कार हुआ। परन्तु कम्प्यूटरों को प्रौद्योगिकी के आकाश में उड़ने के लिये तीव्र पंख तब मिले जब 1969 में इंटरनेट का आविष्कार हुआ। तब से और आज तक इसमें तीव्रता में निरन्तर वृद्धि ही हो रही है। भारत में कोलकाता में फोन की पहली घण्टी 1882 में बजी और 1995 में कोलकाता में ही प्रथम सैल्युलर सेवा का आरम्भ हुआ। धीरे-धीरे भारत एक सफल आई0टी0 गंतव्य बनता गया। जहाँ एक ओर इंटरनेट और कम्प्यूटर के जन्म स्थान अमेरिका में साइबर विधियों का भण्डार एकत्र हो गया है वहाँ अब तक भारत में एक मात्र साइबर विधि, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 है जिसको 2008 में संशोधित किया गया। डाॅ0 राय ने कहा कि साइबर एक गैर-भारतीय शब्द है जिसके साथ अनेक आधुनिक और नवीन शब्दों का उदय हुआ, जिनका अनुवाद हिन्दी भाषा में न ही उपलब्ध है। साइबर पल-पल परिवर्तित होने वाला विषय है। देश की एक मात्र साइबर विधि, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2002 कई विषयों पर मौन है जैसे बिट्काॅइन जो आॅनलाइन करेंसी है और जिसको भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अब तक कोई मान्यता प्रदान नहीं की गयी है, आई0टी0 अधिनियम में नहीं, या नेट तटस्थता, क्लाउड कम्प्यूटिंग आदि का भी उल्लेख नहीं मिलता। ऐसे विषयों पर विधि निर्माण की अनुशंसा की जाती है। व्याख्यान का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्या एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रबन्धक ने किया। व्याख्यान में प्राध्यापकगण तथा बी0एड्0 की छात्र-छात्रायें उपस्थित रहीं।

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