सोशल मीडिया एक सर्वव्यापी प्लेटफार्म: प्रो. मनोज दीक्षित

  • ‘‘सोशल मीडिया: वरदान या अभिशाप’’ विषय पर हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता

  • पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा ने किया प्रतियोगिता का शुभारम्भ

फैजाबाद। अखिल भारतीय हेमवती नन्दन बहुगुणा स्मृति समिति एवं डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद के संयुक्त तत्वावधान में संत कबीर सभागार में रविवार को ‘‘सोशल मीडिया: वरदान या अभिशाप’’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश की पर्यटन मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा रहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि जब भी कोई अविष्कार होता है तो उसका उपयोग भी होता है और दुरूपयोग भी। किन्तु दुरूपयोग से समाज में विध्वंस होता है, सोशल मीडिया पर यह बात लागू होती है। सोशल मीडिया पर कोई फिल्टर नहीं लगता है जबकि सोशल मीडिया के खबरों को डबल फिल्टर से देखने की जरूरत है। प्रो0 दीक्षित ने कहा कि सोशल मीडिया एक सर्वव्यापी प्लेट फार्म है। आज इसका उपयोग करोड़ों लोग कर रहे है इसके उपयोग में यदि हम राष्ट्र की संस्कृति को अपनी धरोहर नही मानेंगे तो हमारी पहचान खत्म हो जायेगी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. रीता बहुगुणा ने कहा कि हमारे देश में बहुत सी विभुतियां हुई है, जिनके लिए राष्ट्र ही उनका परिवार था। उन्हीं में एक नाम हेमवती नन्दन बहुगुणा का भी है। उन्होंने कई विषयों का विशद् अध्ययन किया था। उनके समकालीन राजनीति में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए शिक्षा का विशेष महत्व था। प्रो. बहुगुणा ने कहा कि पुरोधा नेताओं के जीवन को देखने पर एक बात स्पष्ट है कि सभी ज्ञानी जन थे। उन लोगों ने डिग्री या उपाधि के लिए नहीं बल्कि ज्ञान को प्राप्त करने के लिए विद्या संस्थानों में शिक्षा ग्रहण की। वे लोग राष्ट्र की नब्ज को अच्छी तरह समझते थे, और आवश्यकता पड़ने पर समुचित कार्यवाही भी करते थे। इस बात की पुष्टि उन नेताओं को करीब से जानने वाले लोग भी करते है।
विशिष्ट अतिथि इन्द्र भूषण पाण्डेय ने हेमवती नन्दन बहुगुणा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुगुणी होने के कारण ही उनकों बहुगुणा की उपाधि दी गई। प्रतियोगिता का विषय आज के परिदृश्य में सारगर्भित एवं ज्वलंत है। सोशल मीडिया का उपयोग भारतीय समाज में बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसका उपयोग राजनैतिक दल भी सक्रियता के साथ कर रहे है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के समन्वयक प्रो0 फारूख जमाल द्वारा किया गया। वाद-विवाद प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डाॅ. प्रदीप खरे, डाॅ. नजीर नजर एवं शुचिता पाण्डेय सम्मिलित रही। इस अवसर पर कार्यपरिषद् सदस्य ओ0पी0 सिंह, गिरीशपति त्रिपाठी, मुख्य नियंता प्रो0 आर0एन राय, प्रो.आशुतोष सिन्हा, प्रो0 आर0के0 तिवारी, प्रो0 हिमांशु शेखर सिंह, प्रो0 चयन कुमार मिश्र, डाॅ0 आर0के सिंह, डाॅ0 विनोद श्रीवास्तव, डाॅ0 वन्दिता पाण्डेय, डाॅ0 शेलेन्द्र कुमार आदि शिक्षकों सहित प्रतिभागी विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस प्रतियोगिता में आवासीय परिसर के समस्त विभाग एवं विश्वविद्यालय से सम्बद्व महाविद्यालय स्तर के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। प्रतिभाग करने वाले प्रतिभागी को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए 4$1 मिनट का समय दिया गया। विश्वविद्यालय स्तर पर विजयी प्रतिभागी 18 सितम्बर को लखनऊ में आयोजित अन्र्तविश्वविद्यालयी प्रतियोगिता में भाग लेंगे। 19 सितम्बर को होने वाले समापन समारोह में प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी को पुरस्कृत किया जायेगा। उक्त समारोह में मुख्य अतिथि केन्द्रीय कानून एवं सूचना प्रौद्यगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद होंगे। इसका आयोजन सी0एम0एस0 आडीटोरियम गोमती नगर लखनऊ में किया जायेगा। पुरस्कार के क्रम में प्रथम पुरस्कार धनराशि 51,000, द्वितीय पुरस्कार 31,000, तृतीय पुरस्कार 21,000 एवं सान्तवनां पुरस्कार 11,000 दिया जायेगा।

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