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अवधी सभ्यता से परिचित हुए देश-प्रदेश के वैज्ञानिक

-वैज्ञानिकों के सम्मान में आयोजित हुआ कार्यक्रम, लोक कलाकारों ने रामलला के स्वरूपों को दर्शाया

मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में शनिवार को बदलती जलवायु व्यवस्था के तहत सब्जी उत्पादन में तकनीकी नवाचार विषय पर स्वर्ण जंयती राष्ट्रीय संगोष्ठी में रविवार को भी वैज्ञानिकों ने चर्चा की। विवि में 37 वर्षों के बाद यह गोल्डेन जुबली राष्ट्रीय संगोष्ठी मनाया जा रहा है। गोल्डेन जुबुली की संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया जिसमें अयोध्या से आए लोकनृत्य कलाकारों ने अवधी सभ्यता पर एक से बढ़कर एक झलकियां प्रस्तुत की जिससे देश एवं प्रदेश से आए वैज्ञानिक अवधी सभ्यता से परिचित हुए।

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साथ ही साथकार्यक्रम के मुख्यअतिथि रहे आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक डा. आर.एस परौदा की धर्मपत्नी डा. शशि परौदा, कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह की धर्मपत्नी मीना सिंह एवं अन्य वैज्ञानिकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया गया। अयोध्या से आए कलाकारों ने अपने लोक नृत्य के माध्यम से अवधी सभ्यता को दर्शाया। साथ ही लोक नृत्य कलाकारों ने रामा रामा रटते रटते……… राम आवें अवध की ओर सजनी………..आदि गानों पर भगवान रामलला के विभिन्न स्वरूपों को नृत्य एवं नाटकीय मंचन के जरिए पेश किया, जिससे वैज्ञानिक भाव विभोर हो गए।

सामुदायिक विज्ञान की छात्राओं ने विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत कर महिला सशक्तीकरण, महिला सुरक्षा एवं महिला उद्यमिता के प्रति लोगों को जागरूक किया। इस मौके पर डा. शशी परौदा ने कहा कि छात्र-छात्राओं के सामने किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर शिक्षकों को जानकारी देनी चाहिए। कुलपति की धर्मपत्नी मीना सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राएं अपना लक्ष्य हमेशा उंचा बनाएं और उसे पाने के लिए कठिन परिश्रम करें। कठिन परिश्रम से व्यक्ति को सफलता जरूर मिलती है। सामुदायिक विज्ञान की अधिष्ठाता डा. साधना सिंह एवं कृषि अधिष्ठाता डा. प्रतिभा सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। डा. नवाज खान एवं डा. वी.के पाल के संयोजन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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