-दो तिहाई मनोविकार का है बाल्य, किशोर व युवा उम्र आधार , पेरेंटल इग्नोरेंस व स्टिग्मा है मनोउपचार में बाधा

अयोध्या। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक तिहाई मनोविकारों की शुरुवात 14 वर्ष, आधे 18 वर्ष तथा दो तिहाई 25 वर्ष की आयु तक शुरू हो जाते हैं। सत्तर से नब्बे फीसदी लोग अज्ञानता, अस्वीकार्यता, संकोच, सामाजिक कलंक व अन्धविश्वास के कारण अपने पाल्य ससमय इलाज नही ले पाते हैं।
आवेग,अपराधबोध, हताशा, अकादमिक व कैरियर स्ट्रेस, पैरेंटल प्रेशर, लवलाइफ कांफ्लिक्ट, कंपल्सिव सेक्सुअल बेहैवियर,गेमिंग, गैम्बलिंग, मूड-डिसऑर्डर, ओ सी डी,एन्गजाइटी दिसोडर, ईटिंग व स्लीप डिसऑर्डर, पर्सनालिटी डिसऑर्डर,कंडक्ट डिसऑर्डर आदि बाल्य, किशोर व युवा मनोविकार के मुख्य पहलू है।
इन्ही गंभीरताओं के मद्देनज़र विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम के अनुरूप पैरेंट्स द्वारा अनुभव किये जाने वाले चाइल्ड बिहैवियरल इश्यूज का मनोविश्लेषण व उनके प्रबंधन टिप्स से प्रशिक्षित करने के उद्देश्य के तहत मिलिट्री हॉस्पिटल अयोध्या द्वारा सैन्य परिवार के लिये हेल्दी पैरेंटिंग ट्रेनिंग सेशन का आयोजन डोगरा रेजिमेंट सेंटर के अवध ऑडिटोरियम में किया गया।
आयोजित सत्र में बच्चों व किशोरों के भावनात्मक व व्यवहारात्मक समस्याओं के शुरुवाती संकेतों व लक्षणों की पहचान व फैमिली फर्स्ट ऐड व पैरेंटल सेंसिटाइज़ेशन के साथ विशेषज्ञ परामर्श के स्मार्ट टिप्स साझा किये गये। इंस्टीट्यूशनल मेन्टल हेल्थ के प्रशिक्षक व जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्श डा आलोक मनदर्शन ने बताया कि इन प्रशिक्षण से वार्ड व पैरेंट दोनों के मनोस्वास्थ्य संवर्धन में अभिवृद्धि होगी तथा हर संस्थान में मेन्टल हेल्थ क्लब सक्रिय किये जाएंगे जिसके तहत प्रशिक्षित पैरेंट व टीचर स्टूडेंट मेन्टल हेल्थ ऐंड पर्सनालिटी डेवलपमेंट के प्रेरक का कार्य करेंगे।