पीआरटी सदस्यों ने कृषि प्रक्षेत्रों का किया अवलोकन

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मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के नैक मूल्यांकन के लिए आई पीआरटी के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों व प्रछेत्रो के अवलोकन के दौरान पशुचिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के विभागों के निरीक्षण के साथ ही डेयरी व पशुचिकित्सालय का अवलोकन किया तथा यहां की व्यवस्थाओं व मानकों की समीक्षा की। पी आर टी सदस्यों ने गृह विज्ञान महाविद्यालय का भी निरीक्षण किया तथा शैक्षणिक, शोध व प्रसार गतिविधियों की जानकारी ली। विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से गठित पी आर टी जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ए आर पाठक की अध्यक्षता में मंगलवार से अपना निरीक्षण का कार्य कर रही है। विश्वविद्यालय में टीम छात्रावासों, खेल व सांस्कृतिक गतिविडियों के संचालन की दृष्टि से उपलब्ध संसाधनों समेत प्रछेत्रों से लेकर प्रयोगशालों व कक्षा तक विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध संसाधनों का सूक्ष्म रूप से मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। टीम ने उद्यान एव वानिकी महाविद्यालय का भी अवलोकन कर लिया है। बुधवार की शाम विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया जिस अवसर पर पी आर टी सदस्यों ने उपस्थित रहकर विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रतिभा का जायजा लिया। ज्ञात हो विश्वविद्यालय में कुल 6 महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं जिनमे कृषि महाविद्यालय, पशुचिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, गृह विज्ञान महाविद्यालय, उद्यान एव वानिकी महाविद्यालय, मत्स्यकीय महाविद्यालय तथा अम्बेडकर नगर जनपद में संचालित कृषि अभियन्त्रण महाविद्यालय शामिल हैं। इस दौरान कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह समेत अधिष्ठाता गृह विज्ञान डॉ डी के द्विवेदी, अधिष्ठाता उद्यान एव वानिकी डॉ ओ पी राव, निदेशक प्रसार प्रो ए पी राव, निदेशक शोध डॉ गजेंद्र सिंह, मूल्यांकन के नोडल अधिकारी डॉ हरनाम सिंह, डॉ वी एन राय आदि अधिकारी उपस्थित रहे। पी आर टी के द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से निर्धारित प्रोफार्मा के मुताबिक इन महाविद्यालयों का मूल्यांकन किया जा रहा है तथा इसमें प्राप्त नम्बरों के आधार पर नैक ग्रेडिंग विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों को प्राप्त हुई है। यदि नैक मूल्यांकन में विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों को ग्रेडिंग हासिल करने में सफलता प्राप्त हो जाती है तो विश्वविद्यालय को मिलने वाली आई सी ए आर की ग्रांट शोध ,शिक्षा व प्रसार के लिए पर्याप्त रूप से मिलने लगेगी।